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‘मेरे पापा की शादी से भी पहले’, KKR के गेंदबाजों को कूटकर हारा हुआ मैच जिताने वाले मुकुल चौधरी का बड़ा खुलासा

Mukul Choudhary ने बताया कि कैसे उनके क्रिकेट का सफर उनके पिता के सपने से शुरू हुआ। उन्‍होंने 12-13 साल की उम्र से क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। झुंझुनू में सीमित संसाधनों के चलते पहले वह जयपुर गए और फिर वहां से गुरुग्राम जाकर कोचिंग ली।

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भारत

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lokesh verma

Apr 10, 2026

Mukul Choudhary

एलएसजी के युवा खिलाड़ी मुकुल चौधरी। (फोटो सोर्स: वीडियो स्‍क्रीन शॉट)

Mukul Choudhary ने गुरुवार रात कोलकाता नाइट राइडर्स से जीत छीनते हुए मैच विनिंग पारी खेली। 21 साल के इस युवा खिलाड़ी ने 182 रनों का पीछा करते हुए महज 27 गेंदों पर ताबड़तोड़ 54 रन बनाए और अकेले अपने दम पर लखनऊ सुपर जायंट्स को जीत दिलाई। मुकुल जब 15वें ओवर में 7वें नंबर पर बल्‍लेबाजी के लिए उतरे तब मैच पूरी तरह केकेआर के कंट्रोल में था। लेकिन, मुकुल ने मौके का फायदा उठाया और दबाव में संयम बरतते हुए पहली ही गेंद से गेंदबाजों पर हमला बोल दिया और पूरे मैदान में ताकत और सटीकता के साथ शॉट लगाए। वैसे तो उन्‍होंने कई बड़े शॉट लगाए, लेकिन सबसे ज्‍यादा चर्चा एमएस धोनी की याद दिलाने वाला 'हेलीकॉप्टर शॉट' रहा, जिसने फैंस के साथ कमेंटेटर्स को भी रोमांचित कर दिया।

12-13 साल की उम्र में खेलना शुरू किया क्रिकेट

मुकुल चौधरी 'प्लेयर ऑफ द मैच' का खिताब जीतने के बाद बताया कि कैसे उनके क्रिकेट का सफर उनके पिता के सपने से शुरू हुआ था। उन्‍होंने बताया कि मेरे पापा की शादी से भी पहले, उनका यह सपना था कि उनका बेटा क्रिकेट खेले। शुरुआत में हमारी आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं थी। मैंने 12-13 साल की उम्र में खेलना शुरू किया। झुंझुनू में ज्‍यादा क्रिकेट अकादमियां नहीं थीं, इसलिए मैं जयपुर चला गया। मैंने देखा कि टी20 क्रिकेट तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसलिए मैं गुड़गांव चला गया और वहां 3-4 महीने तक रहा।

'तभी उन्हें यकीन हो गया कि मैं आगे चलकर कुछ बड़ा करूंगा'

मुकुल ने उत्तर प्रदेश के खिलाफ अंडर-19 मैच में अपने शानदार प्रदर्शन को अहम पल बताया, जब उनके पिता को एहसास हुआ कि उनमें बड़ा मुकाम हासिल करने का टैलेंट है। उन्‍होंने बताया कि मेरे पापा मुझे बताते हैं कि यूपी के खिलाफ एक अंडर-19 मैच हुआ था। वह एक कम स्कोर वाला मैच था, लेकिन मैंने उसमें रन बनाए और तभी उन्हें यकीन हो गया कि मैं आगे चलकर कुछ बड़ा करूंगा।

'मैं वही करने की कोशिश करता हूं, जो मैं कर सकता हूं'

केकेआर के खिलाफ यह मैच मेरा दूसरा फ्लडलाइट्स में मैच था। दबाव तो हमेशा रहता है। लेकिन, भगवान ने हमें यह मौका दिया है और मैं वही करने की कोशिश करता हूं, जो मैं कर सकता हूं। मैं इसे दबाव के तौर पर लेने के बजाय एक मौके के तौर पर देखता हूं। मेरी योजना थी कि मैं आखिर तक बैटिंग करूं और मुझे खुद पर इतना भरोसा था कि मैं जानता था कि अगर मैं आखिर तक बैटिंग कर पाया, तो मैं अपनी टीम को जीत जरूर दिला दूंगा।

'मैं उसी गेंद का इंतजार कर रहा था'

आपका पसंदीदा छक्का कौन सा था? पहला वाला। मैंने पिछले दो मैचों में कोई छक्का नहीं मारा था, इसलिए वह पहला छक्का मेरे लिए खास था। वह भी अच्छा था (वह शॉट जो उन्होंने पॉइंट के ऊपर से छक्के के लिए मारा था), आखिरी ओवर की 5वीं गेंद से पहले क्या सोच थी? इस पर मुकुल ने कहा कि मेरी सोच यह थी कि भले ही गेंदबाज एकदम सही गेंदें डाले, कम से कम एक गेंद तो मेरे जोन में आएगी ही। मुझे छक्का मारने के लिए बस एक गेंद चाहिए। मैं उसी गेंद का इंतजार कर रहा था।

'यह मेरे खून में है'

उन्‍होंने अंत में बताया कि बचपन से ही मैंने हमेशा आक्रामक क्रिकेट खेला है। मैं हमेशा से ऐसा खिलाड़ी रहा हूंं, जो जोरदार शॉट मारता है। अब मैं अपने खेल को बेहतर समझता हूं। अगर गेंद मेरे एरिया में आती है, तो मुझे पता होता है कि मुझे उसे मारना है। झुंझुनू जैसी जगह जहां बहुत से लोग भारतीय सेना में सेवा करते हैं और आज रात आप एक जवान की तरह खेले। इस पर मुकुल ने कहा कि यह मेरे खून में है। मैं यहां यह कर रहा हूं, लेकिन वे सीमा पर देश की सेवा करते हैं।