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रसोइए के साथ मारपीट के आरोप पर पहली बार बोले शशांक सिंह, सोशल मीडिया पर लिखा भावुक पोस्ट, कहा – वसूली की थी साजिश

शशांक और उनके पिता, रिटायर्ड स्पेशल डायरेक्टर जनरल (डीजी) ऑफ पुलिस शैलेश सिंह पर भोपाल की रातीबाद पुलिस ने केस किया था। पिता-पुत्र पर घर पर काम करने वाले एक रसोइए के साथ मारपीट, गाली-गलौज और जबरदस्ती उसका मोबाइल छीनने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
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भारत

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Siddharth Rai

Jul 12, 2026

FIR on Shashank Singh

शशांक सिंह (फोटो- IANS)

इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की फ्रेंचाइजी पंजाब किंग्स (PBKS) के बल्लेबाज शशांक सिंह ने रविवार को अपने परिवार से जुड़े एक हालिया विवाद के बारे में खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि उनकी सार्वजनिक छवि को खराब करने के लिए एक झूठी 'एफआईआर' दर्ज कराई गई है। इसके माध्यम से जबरन वसूली की साजिश की गई है।

रसोइए के साथ मारपीट, गाली-गलौज का आरोप

पिछले महीने, शशांक और उनके पिता, रिटायर्ड स्पेशल डायरेक्टर जनरल (डीजी) ऑफ पुलिस शैलेश सिंह पर भोपाल की रातीबाद पुलिस ने केस किया था। पिता-पुत्र पर घर पर काम करने वाले एक रसोइए के साथ मारपीट, गाली-गलौज और जबरदस्ती उसका मोबाइल छीनने के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।

शशांक सिंह ने सोशल मीडिया पर एक लंबा पोस्ट लिखते हुए मामले पर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने लिखा, "इस घटना ने मुझे हमेशा के लिए बदल दिया और मुझे ऐसे सबक सिखाए जो मैं जिंदगी भर साथ रखूंगा। मैं यह हमदर्दी के लिए नहीं लिख रहा हूं। मैं यह इसलिए लिख रहा हूं क्योंकि यह पहली बार था जब मेरे परिवार और मैंने ऐसा कुछ अनुभव किया, और मुझे उम्मीद है कि दूसरे लोग इससे सीखेंगे।"

शशांक ने लिखा भावुक पोस्ट

दाएं हाथ के बल्लेबाज ने लिखा, "एक एथलीट के तौर पर, मैंने सालों तक बुराई, ट्रोलिंग और गाली-गलौज का सामना किया है। मैंने इसके साथ जीना सीख लिया है। लेकिन यह अलग था। रातों-रात, मुझे ऐसे दिखाया गया जैसे मैंने अपने से कम सुविधा वाले इंसान को पीटा हो। हजारों लोगों ने सच जाने बिना मुझे गाली दी।"

उन्होंने लिखा, "जब हमने बाद में उसे वीडियो में देखा तो हम चौंक गए, क्योंकि वह हमारे घर से बिल्कुल ठीक निकला था। हमें यह समझने में समय लगा कि कोई इतनी बुरी तरह कैसे पिट सकता है। वह अपनी ही जिद पर हमारे घर आया था, लेकिन हमने उसे तीसरे दिन वापस भेज दिया जब हमने उसे घर में घूमते हुए, घर के अंदर फोटो लेते हुए, और उन्हें अपने दोस्तों को भेजते हुआ पाया।"

पुलिस रिकॉर्ड से पता चला रसोइए पर 9 एफआईआर थीं

शशांक ने लिखा, "पुलिस रिकॉर्ड से पता चला कि उसके खिलाफ पहले से ही 9 एफआईआर दर्ज थीं और उस पर 8 मामलों में चार्जशीट भी हो चुकी थी, जिसमें हत्या की कोशिश, घर में चोरी (जो हमें बाद में पता चला कि उसने हमारे घर पर भी की थी), मारपीट, घर में बिना इजाजत घुसना, चोट पहुंचाकर जबरदस्ती वसूली, क्रिमिनल धमकी, अश्लील हरकतें, एससी/एसटी कानून के तहत अपराध और दूसरे अपराध शामिल थे। वह अपनी पहचान छिपाने के लिए तीन अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर रहा था।"

शशांक ने बताया कि यह पूरी घटना पैसे के फायदे के लिए उन पर दबाव बनाने का एक जाल था। सिंह ने लिखा, "जैसे-जैसे और बातें सामने आईं, मुझे यकीन हो गया कि वह कभी भी हमारे घर में नेक इरादे से नहीं आया था। मेरा मानना ​​है कि प्लान था कि झूठी एफआईआर दर्ज करके मुझ पर दबाव बनाया जाए, यह उम्मीद करते हुए कि मैं अपनी सार्वजनिक पहचान बचाने के लिए पैसे दूंगा। मेरे हिसाब से, एफआईआर का इस्तेमाल असली शिकायत के बजाय जबरदस्ती वसूली के एक टूल के तौर पर किया गया।

इतनी आसानी से दर्ज़ हो गई एफ़आईआर

उन्होंने लिखा, "मुझे ज्यादा परेशानी इस बात से हुई कि, जहां असली पीड़ित अक्सर गंभीर अपराधों के लिए भी एफआईआर दर्ज करवाने के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं मेरे और मेरे परिवार के खिलाफ बिना हमारा पक्ष सुने या हमसे पूछताछ किए बिना एफआईआर दर्ज कर ली गई।"

उन्होंने 30 अप्रैल, 2026 को हुई एक ऐसी ही कथित घटना से उन्हें जोड़ने वाली मीडिया रिपोर्ट्स को भी गलत बताया। उन्होंने बताया कि एक बेसिक फैक्ट-चेक से अफवाहें गलत साबित हो जातीं, क्योंकि वह ठीक उसी तारीख को आईपीएल में सक्रिय रूप से खेल रहे थे।

क्रिकेटर ने कहा, "मुझे याद आया कि जब अफवाहों को सच माना जाता है और हेडलाइन के लिए जांच-पड़ताल को नजरअंदाज किया जाता है, तो कितनी आसानी से प्रतिष्ठा खराब हो सकती है।" शशांक ने कहा, "राहत की बात यह रही कि घटना वाले दिन मैं घर पर अपने माता-पिता के साथ था, इस वजह से हम किसी अन्य बड़ी घटना से बच गए।"

आईपीएल स्टार ने लोगों से अपील करते हुए लिखा, "सभी सतर्क रहें और स्टाफ रखते समय उसका बैकग्राउंड जांचें। हमदर्दी को कभी भी कॉमन सेंस की जगह न लेने दें। हमेशा सही पुलिस वेरिफिकेशन के बाद ही किसी रजिस्टर्ड एजेंसी से ही घरेलू मदद रखें। सिर्फ इसलिए कि कोई बेबस दिख रहा है, रो रहा है, या हमदर्दी चाहता है, इसका मतलब यह नहीं है कि वह सच बोल रहा है। सच में समय लग सकता है, लेकिन उसकी जीत हमेशा होती है।"