
आईपीएल 2025 का खिताब जीतने की खुशी मनाती आरसीबी। (फोटो सोर्स: IANS)
Jitesh Sharma emotional story: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज जितेश शर्मा का कहना है कि भारत की टी20 वर्ल्ड कप टीम से बाहर होना निराशाजनक था, लेकिन जल्द ही उन्हें उस निजी नुकसान के सामने यह झटका छोटा लगने लगा, जो उन्हें कुछ ही समय बाद मिला। जितेश ने 1 फरवरी को अपने पिता मोहन शर्मा को खो दिया, जो बीमारी के चलते दुनिया का अलविदा कह गए। इस पल ने हर चीज को देखने का उनका नजरिया बदल दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जितेश ने एक इंटरव्यू में कहा कि जब मुझे अपने चयनित नहीं होने की खबर मिली, तो मैं थोड़ा निराश हुआ। मैं भी इंसान हूं। मैं दुखी और बुरा महसूस कर सकता हूं, लेकिन बाद में जैसे-जैसे समय बीता तो यह दुख का समय छोटा होता गया। ग्लोबल टूर्नामेंट से बाहर होने की निराशा ने जल्द ही एक बहुत गहरी इमोशनल चुनौती को जन्म दिया।
उन्होंने बताया कि इसके बाद मेरे पापा बीमार पड़ गए और 1 फरवरी को उनका देहांत हो गया। मैं सात दिनों तक उनके साथ था। बाद में मुझे पता चला कि वर्ल्ड कप से ज्यादा मेरे पापा को मेरी जरूरत थी। उसके बाद मुझे किसी के लिए या अपने लिए भी कोई दुख, कोई अफसोस या कुछ नहीं हुआ। मैं नाराज या कुछ भी नहीं हूं। मैं शुक्रगुज़ार था कि भगवान ने मुझे सात दिनों तक अपने पापा के साथ रहने का मौका दिया। इसलिए, मैं उनका ख्याल रख पाया।
उन्होंने आगे कहा कि मुझे घर पर टीवी पर वर्ल्ड कप देखने में मजा आया। यह बहुत अलग एहसास है। यह आपको खेलने के बजाय बहुत ज्यादा प्रेशर देता है। मैं लड़कों के लिए बहुत खुश था। हालांकि पिता के जाने के बाद सबसे बड़ा बेटा होने की जिम्मेदारी उनकी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन गई है।
जितेश ने आगे कहा कि मैं उस बात को भूल नहीं सकता और मैं उस बात को भूलना भी नहीं चाहता, क्योंकि वह अब नहीं रहे। जब आप अपने पापा को खो देते हैं, तो कुछ दिनों बाद आपको पता चलता है कि अब आप बड़े बेटे के तौर पर अपने परिवार में फैसले लोगे। अपनी मां, भाई और परिवार का ख्याल रखोगे। मैं ऐसा इंसान हूं, जो उन्हें अपनी फीलिंग्स नहीं दिखा सकता और उनके सामने कमजोर नहीं पड़ सकता, क्योंकि वे क्रिकेट खेलते समय भी मुझे देख रहे होते हैं। मुझे इसे मानना होगा। जितेश ने यह सोचते हुए कहा कि जिंदगी कभी-कभी कैसे सबसे मुश्किल चैलेंज देती है।
जितेश मानते हैं कि दुख एक बार में नहीं आता, बल्कि धीरे-धीरे घर कर जाता है और हमेशा के लिए खालीपन छोड़ जाता है। यह कुछ समय बाद होता है। मैं किसी भी चीज से निपट नहीं पा रहा हूं। मैं बस यह मान रहा हूं कि मेरे पापा अब नहीं रहे। मेरे दिल का एक हिस्सा अब खाली है। मेरे पापा की वजह से यह मेरे मरने तक खाली रहेगा। हालांकि, क्रिकेट ने उन्हें हिम्मत भी सिखाई है, जिससे उन्हें दर्द के बावजूद आगे बढ़ने में मदद मिली है। मैं कितना भी चाहूं, मैं उस चीज़ को भूल नहीं सकता। क्योंकि वह तुम्हारे पापा हैं, है ना? वह मेरी ज़िंदगी के हीरो हैं। अगर वह आज ज़िंदा होते, तो वह मुझसे कहते कि जाओ और प्रैक्टिस करो। मेरी चिंता मत करो।
जितेश ने अपने इंडिया टीम के साथी रिंकू सिंह से भी तुलना करते हुए कहा कि वह समझते हैं कि पर्सनल मुश्किलों के बाद मैदान पर लौटने के लिए कितनी इमोशनल ताकत चाहिए होती है। रिंकू ने भी यही महसूस किया होगा। इसीलिए वह फिर से मैदान पर आ पाए और यह बहुत बड़ी बात है।
Updated on:
12 Mar 2026 10:20 am
Published on:
12 Mar 2026 10:20 am
बड़ी खबरें
View Allक्रिकेट
खेल
ट्रेंडिंग
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
