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यशस्वी के शतक से इंडिया U-19 ने श्रीलंका के खिलाफ आखिरी वनडे जीत सीरीज पर जमाया कब्जा

श्रीलंका ने यहां ताइरोने फर्नाडो स्टेडियम में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 212 रन का स्कोर बनाया, जिसे भारत ने 42.4 ओवर में दो विकेट खोकर हासिल कर लिया।
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Akashdeep Singh

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Updated: 11 Aug 2018, 9:15 AM IST

INDIA U19 CRICKET TEAM

यशस्वी के शतक से इंडिया U-19 ने श्रीलंका के खिलाफ आखिरी वनडे जीत सीरीज पर जमाया कब्जा

नई दिल्ली। सलामी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल (नाबाद 114) के शानदार शतक के दम पर भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम ने पांचवें और निर्णायक वनडे मैच में शुक्रवार को श्रीलंका को आठ विकेट से हराकर पांच मैचों की वनडे सीरीज 3-2 से अपने नाम कर ली। मेजबान श्रीलंका ने यहां ताइरोने फर्नाडो स्टेडियम में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए नौ विकेट पर 212 रन का स्कोर बनाया, जिसे भारत ने 42.4 ओवर में दो विकेट खोकर हासिल कर लिया।


जायसवाल का शतक-
जायसवाल ने 128 गेंदों पर आठ चौके और तीन छक्के लगाए। इसके अलावा देवदत्त पडिकल ने 48 गेंदों पर छह चौकों की मदद से 38 और पवन शाह ने 45 गेंदों पर तीन चौकों और एक छक्के सहारे 36 रन का योगदान दिया। कप्तान आर्यन जुयाल ने नाबाद 22 रन बनाए। श्रीलंका के लिए लक्षिता मानसिंगे और अविस्का लक्षण को एक-एक विकेट मिला।


श्रीलंका की पारी-
इससे पहले, श्रीलंका की टीम भारत की कसी गेंदबाजी के सामने नौ विकेट पर 212 रन ही बना सकी। मेजबान टीम के लिए विकेटकीपर बल्लेबाज निरोशन डिकवेला शतक बनाने से चूक गए। उन्होंने 137 गेंदों पर सात चौकों की बदौलत 95 रन बनाए।नोवानिदु फर्नाडो ने 68 गेंदों पर पांच चौके और एक six लगाया तथा 50 रन की पारी खेली। टीम के सात बल्लेबाज दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सके। भारत की ओर से मोहित जांगड़ा ने 30 रन देकर सर्वाधिक दो विकेट लिए। इसके अलावा अजय देव गौड़, सिद्वार्थ देसाई, हर्ष त्यागी, आयुष बदौनी और समीर चौधरी को एक-एक विकेट मिला।


कठनाइयों से भरा रहा है जायसवाल का जीवन-
अंडर 19 टीम में शामिल इस ऑल राउंडर का नाम है यशस्वी जायसवाल। यशस्वी मूलत: उत्तरप्रदेश के भदोही जिला के रहने वाले है। यशस्वी बचपन से ही क्रिेकेट में बड़ा नाम कमाने की चाहत रखते थे। लिहाजा 11 साल की उम्र में वे मुंबई आ गए। जहां वे आजाद मैदान में मुस्लिम यूनाइटेड क्लब से जुड़े। परिवार ने उन्हें मुंबई भेज तो दिया। लेकिन मायानगरी में रहने और जीने लायक पैसा दे पाने में असमर्थता जता दी। उनको परिवार से आर्थिक सहायता अधिक नहीं मिलती थी इस कारण उन्होंने अपना पेट पालने को पानी-पूरी तक बेचीं।