
नई दिल्ली। हाल ही में टीम इंडिया में सुरेश रैना और युवराज सिंह जैसे दिग्गजों की वापसी नहीं हो पाई थी। तब यह बताया गया था कि इन सीनियर खिलाड़ियों ने यो यो बीप टेस्ट में कम स्कोर किया था। इसके बाद यह आशंका जाहिर की गई कि क्या टीम में इंट्री करने के लिए हर क्रिकेटर को यो यो टेस्ट पास करना ही होगा? अब इस संशय से पर्दा उठ गया है। भारतीय क्रिकेट टीम और प्रबंधन ने यह साफ कर दिया है कि राष्ट्रीय टीम में शामिल होने से पहले हर खिलाड़ी को यो यो टेस्ट पास करना होगा। इस बात की पुष्टि बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी ने कर दी है।
क्या कहा राहुल जौहरी ने
बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी ने कहा कि यदि कोई खिलाड़ी पूरी तरह चोटों से मुक्त है, अच्छी फॉर्म में है। तो उसके लिए भी ये फिटनेस टेस्ट पास करना जरूरी होगा। यदि वह ऐसा नहीं कर पाता तो उन खिलाड़ियों की जगह पर मुकाबले दूसरे फिट खिलाड़ी को मौका दिया जाएगा। जौहरी ने साफ किया कि कप्तान, कोच और मुख्य चयनकर्ता, चयन समिति के अन्य सदस्यों ने स्पोर्ट स्टाफ, ट्रेनर और फिजियो के साथ सलाह-मशविरा करके फिटनेस के कुछ मानक तय किए हैं। इन मानकों पर किसी तरह की कोई रियायत नहीं दी जाएगी।
क्रिकेट के हर फॉर्मेट के लिए जरुरी
बीसीसीआई की ओर से इस बात को साफ किया गया कि यो यो टेस्ट क्रिकेट के प्रत्येक फॉर्मेट के लिए अनिवार्य होगा। मतलब साफ है कि अब टी-20, वन-डे या टेस्ट टीम में जगह बनाने की जुगत में लगे खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन के साथ-साथ यो यो टेस्ट को भी पास करना होगा। पहले टेस्ट क्रिकेट में क्रिेकेटर के तकनीक को ज्यादा महत्व दिया जाता था। लेकिन अब फिटनेस उस पर हावी होगी।
क्या होता हो यो यो टेस्ट
यो यो टेस्ट को पहले फुटबाल, रग्बी जैसे खेलों में आजमाया जाता था। यह टेस्ट किसी खिलाड़ी के दमखम का परीक्षण करने के लिहाज से सबसे अहम माना जाता है। यो यो टेस्ट में अलग अलग कोन्स की मदद से 20 मीटर की दूरी पर दो पंक्तियां बनाई जाती हैं। इसमें खिलाड़ी को रेखा के पीछे अपना पांव रखकर शुरुआत करता है। निर्देश मिलते ही खिलाड़ी दौड़ना शुरू करता है। उसे 20 मीटर की दूरी पर बनी दो पंक्तियों के बीच लगातार दौड़ना होता है और जब बीप बजती है तो मुड़ना होता है। इस टेस्ट में कम से कम 16.1 को स्कोर करना होता होता है।
Published on:
09 Oct 2017 03:30 pm
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