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दिल्ली के बुराड़ी में 11 लाशों का सच, मौत की डायरी में लिखी बातें जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

दिल्ली के बुराड़ी में 11 लाशों का सच, मौत की डायरी में लिखी बातें जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

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दिल्ली के बुराड़ी में 11 लाशों का सच, मौत की डायरी में लिखी बातें जानकर उड़ जाएंगे आपके होश

नई दिल्ली। दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की मौत का रहस्य काफी हद तक खुलता जा रहा है। हालाकि बुराड़ी के संतनगर में एक दिल दहला देने वाली घटना से पूरा देश सकते में हैं। इस मामले में पुलिस ने सामूहिक हत्याकांड का केस दर्ज कर क्राइम ब्रांच को जांच सौंप दी, लेकिन कई घंटे की तफ्तीश के बाद घर जो सबूत मिले हैं उनमें बरामद हुए मौत की डायरी (रजिस्टर) ने सबको हिला कर रख दिया है।

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इस डायरी में लिखी हुई बातें जानकर आपके भी होश उड़ जाएंगे। इस सबूत के आधार पर जांच सामूहिक आत्महत्या की ओर घूम गई। चौंकाने वाली बात तो यह कि घर के सारे मोबाइल और टैब मंदिर के पास एक पॉलिथीन में बंधे मिले, सभी साइलंट मोड पर थे। पुलिस की मानें तो रजिस्टर में अलौकिक शक्तियां, मोक्ष के लिए मौत ही एक द्वार और आत्मा का अध्यात्म से रिश्ता जैसी अजीबो गरीब बातें लिखी हुई हैं। जांच टीम ने जब इन पन्नों को पलटा तो उसमें लिखा हुआ हर शब्द पढ़ पैरों के नीचे से जमीन खिसकने लगी। आइए जानते हैं मौत की इस डायरी में आखिर ऐसा क्या लिखा है जिसने सभी हिला कर रख दिया है...


26 को लिखी गई मौत की स्क्रिप्ट
मौत की डायरी में आखिरी बार 26 जून को लिखा गया था, जिसमें इस बात का जिक्र था कि अगर हमें 30 जून को परमात्मा से मिलना है तो हम सब हाथ पांव, मुंह पूरी तरह बांधेंगे ताकि किसी की सुन न सकें।
मोक्ष के लिए त्यागना होगा जीवन
रजिस्टर की सबसे बड़ी बात जो सामने आई है वो है मोक्ष...इस रजिस्टर में लिखा हुआ है कि मोक्ष प्राप्त करना है तो जीवन को त्यागना होगा।
मौत को गले लगाना होगा
आगे लिखा है जीवन को त्यागने के लिए मौत को गले लगाना होगा। मौत को गले लगाने में कष्ट होगा। लेकिन इस कष्ट को स्वीकारना होगा।

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बंद करना होगी आंखें
मौत को गले लगाने में कष्ट तो होगा लेकिन इस कष्ट से छुटकारा पाना है तो आंखें बंद करनी होंगी। यहां आपको बता दें कि जब घर में 11 शव मिले तो 10 की आंखों पर पट्टी बंधी हुई थी, यानी कष्ट से छुटकारे के लिए परिजनों ने आंखों पर पट्टी बांधी थी...
रात 1 बजे करनी है साधना
मौत की इस डायरी में यह भी लिखा गया है कि रात 1 बजे के बाद यह साधना करनी है। इस साधना को करने से पहले नहाना नहीं है, केवल हाथ और मुंह धोकर बैठना होगा।
हाथ-पैर खोलने में करें दूसरों की मदद
डायरी का यह सच आपको और चौंका देगा। इसमें लिखा है कि सभी को अपने-अपने हाथ-पैर खुद बांधने होंगे। हां, हाथ-पैर खोलने के लिए हम लोग एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं।
बुजुर्ग महिला के लिए अलग व्यवस्था
डायरी में लिखी बातें पढ़ते-पढ़ते आपके पैरों के नीचे से जमीन खिसकने लगेगी। मौत की इस डायरी में परिवार की सबसे बुजुर्ग महिला के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। इसमें लिखा है कि माताजी बहुत बुजुर्ग हैं, इसलिए वह साधाना करने के लिए स्टूल पर ना तो चढ़ पाएंगी और ना ही उस पर ज्यादा देर तक खड़ी रह पाएंगी। ऐसे में उन्हें दूसरे कमरे में साधना करनी होगी।
चेहरे पर न दिखे तनाव
मोक्ष के लिए साधना कर रहा परिवार चाहता था कि जिस वक्त वो मौत को गले लगाए उस वक्त उनमें से किसी के भी चेहरे पर किसी तरह का तनाव नहीं दिखना चाहिए। डायरी में लिखा है, साधना के वक्त किसी के भी चेहरे पर तनाव या दुख नहीं झलकना चाहिए।
चुन्नी और साड़ी के इस्तेमाल का जिक्र
मौत को गले लगाना, जिसे परिवार साधना बता रहा है उसके लिए परिवार के किस सदस्य कौन सी चुन्नी या साड़ी का इस्तेमाल करना है वो भी मौत की इस डायरी में लिखा गया है। साथ ही रजिस्टर में वटवृक्ष और बड़वृक्ष की पूजा करने जैसी बात भी लिखी गई है।
ललित से मिल रही है लिखावट
अब सवाल उठता है कि मौत की इस डायरी में लिखावट किसकी है। ऐसे में पुलिस को शुरुआती तफ्तीश में ये शक है कि रजिस्टर में जो लिखावट है वह ललित की लग रही है। साधना के लिए भाई ललित और भूपी ने मुख्य योजना बनाई थी। बाद में पूरे परिवार को शामिल कर लिया गया था।