
नई दिल्ली। दिल्ली में दो जजों के निलंबन का मामला सामने आया है। लोवर कोर्ट में तैनात इन जजों पर यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट ने की है। इन जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप था। जानकारी के मुताबिक यह कार्रवाई द्वारका कोर्ट के एडिशनल जिला जज जितेंद्र मिश्रा और स्पेशल जज नवीन अरोड़ा पर की गई है। इन दोनों जजों पर भ्रष्टाचार में संलिप्तता का आरोप था। इसके साथ ही दोनों में से एक जज पर केस से जुड़े आरोपी के पैसे पर विदेश यात्रा करने का आरोप भी लगा है। वहीं दूसरे पर केस को खत्म करने के लिए रिश्वत मांगने का आरोप है।
हाईकोर्ट के समक्ष किए थे पेश
जानकारी के अनुसार इन दोनों जजों पर जिन सबूतों के आधार पर भ्रष्टाचार में संलिप्तता के आरोप लगाए गए थे, वो दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए थे। हाईकोर्ट ने जजों पर लगे आरोपों पर गंभीरता दिखाते हुए सबूतों के आधार पर उनको निलंबित कर दिया। बता दें कि इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस ने भी कुछ जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस कर्णन जेल से रिहा हो गए। कर्णन को 6 महीने बाद जेल से रिहा किया गया है। कोर्ट की अवमानना के आरोप में सुप्रीम कोर्ट ने सजा सुनाई थी। दरसअल सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई को कर्णन को न्यायिक प्रक्रिया और न्याय व्यवस्था की अवमानना के आरोप में दोषी मानते हुए छह महीने की सजा की घोषणा की थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जस्टिस कर्णन को जेल भेजा गया था।
सात जजों पर लगाया था आरोप
31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस कर्णन की पेशी हुई थी। दोषी होने के बाद जस्टिस कर्णन ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को असंवैधानिक करार दिया था। उन्होंने कहा था कि 8 फरवरी से ये सात जज मुझे कोई भी न्यायिक और प्रशासनिक कार्य नहीं करने दे रहे हैं। इन लोगों ने मुझे मानसिक तौर पर परेशान कर दिया है। कर्णन ने सात जजों के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कर 14 करोड़ रुपए मुआवजे लेने की भी बात कही थी।
Published on:
23 Dec 2017 03:25 pm
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