24 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

तो क्‍या सरकारी संरक्षण में हुआ बिहार बालिका गृह में बच्चियों से रेप?

बिहार बालिका गृह में बच्चियों से रेप की जानकारी सरकारी एजेंसियों को थी पर बृजेश ठाकुर के सामने किसी की मुंह खोलने की हिम्‍मत नहीं हुई।

4 min read
Google source verification

image

Dhirendra Kumar Mishra

Jul 29, 2018

brijesh thakur

तो क्‍या सरकारी संरक्षण में हुआ बिहार बालिका गृह में बच्चियों से रेप?

नई दिल्‍ली। बिहार बालिका गृह मुजफ्फरपुर में रेप का खुलासा करीब दो महीने पहले हुआ। इस अमानवीय घटना की जांच सीबीआई को सौंपने में सीएम नीतीश कुमार की सरकार को लगभग दो महीने लग गए। बताया जा रहा है कि सरकार ने विपक्षी दलों के आंदोलनकारी मुहिम के दबाव में आकर यह निर्णय लिया। लेकिन सवाल यह उठता है कि सालों से बालिका गृह में बालिकाओं से रेप होता रहा है और सुशासन बाबू के राज में किसी भी सरकारी अमले को पता नहीं चला। यही कारण है कि अब सरकार के सामने यह सवाल यक्ष प्रश्‍न की तरह है कि क्‍या सरकारी संरक्षण में बिहार बालिका गृह में बच्चियों से रेप होता रहा?

सरकारी महकमा मेहरबान क्‍यों?
दरअसल, बिहार बालिका गृह मुजफ्फरपुर में रेल के मामले का खुलासा 31 मई को हुआ। इसी दिन बालिका गृह के कर्ताधर्ता बृजेश ठाकुर के खिलाफ मामला दर्ज हुआ। उसी दिन पटना में मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत एक और अल्पावास का टेंडर दे दिया गय। वर्षों से ठाकुर पर सरकारी महकमा इस कदर मेहरबान रहा है कि अब उसके पास किसी सवाल का जवाब नहीं है। किसी एक एनजीओ को एक साथ इतने टेंडर कैसे मिले? इस सवाल का जवाब न बिहार का समाज कल्याण विभाग दे रहा है और न बाल संरक्षण विभाग। सवाल यह है कि अब बिहार सरकार खुद आगे आकर इसका जवाब देगी। आपको बता दें कि अभी तक इस मामले में एक प्रशासनिक अधिकारी और बृजेश ठाकुर की गिरफ्तारी हुई है।

इन मदों के जरिए ठाकुर को मिले करोड़ों रुपए
ब्रजेश ठाकुर को सरकार से हर साल एक करोड़ रुपए की रकम मिलती रही है। केवल बालिका गृह के लिए ठाकुर को हर साल 40 लाख रुपए मिलते थे, लेकिन इसी बालिका गृह की 34 लड़कियों ने अपनी यातना की जो आपबीती सुनाई है उसे सुन ऐसा लगता है मानो ये 40 लाख रुपए उनके यौन शोषण कराने के लिए दिए जा रहे थे। इसके अलावा मुजफ्फरपुर में ठाकुर को वृद्धाश्रम, अल्पावास, खुला आश्रय और स्वाधार गृह के लिए भी टेंडर मिले हुए थे। खुला आश्रय के लिए हर साल 16 लाख, वृद्धाश्रम के लिए 15 लाख और अल्पावास के लिए 19 लाख रुपए मिलते थे।

34 बच्चियों से हुआ रेप
मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेप कांड में चौकानी वाली सूचना मिल रही है। यहां रखी गई 29 नाबालिग लड़कियों में से छह गर्भवती हो गई थीं। इनमें से तीन का अबॉर्शन भी करवाया गया था। मेडिकल जांच में यह बात सामने आई है। इतना ही नहीं मेडिकल जांच में साबित हुआ है कि गर्भवती हुई लड़कियों की उम्र सात से 14 वर्ष के बीच है। मुजफ्फरपुर एसएसपी हरप्रीत कौर ने कहा है कि बालिका गृह की 42 में से 34 बच्चियों से बलात्कार की बात सामने आई है। जहां पीएमसीएमच की जांच रिपोर्ट के मुताबिक पहले 29 बच्चियों से रेप की बात कही जा रही थी।

सभी नियम बौने साबित हुए
सरकारी महकमें में ब्रजेश ठाकुर के रुतबे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसके सामने सभी नियम बौने साबित हुए। समाज कल्याण विभाग के पास टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस की रिपोर्ट महीनों से मौजूद थी और उसे पता था कि ब्रजेश ठाकुर का एनजीओ सेवा संकल्प कई मामलों में संदिग्ध है। फिर भी यह उसे टेंडर दिया गया। ऐसा यूं ही नहीं हो सकता है! पटना मेडिकल कॉलेज ने 21 में से 16 लड़कियों के साथ की यौन शोषण की पुष्टि की थी। बाद में पीएमसीएच ने 29 लड़कियों के साथ रेप की पुष्टि की। बाल संरक्षण यूनिट के सहायक निदेशक देवेश कुमार शर्मा भी बालिका गृह में निगरानी के लिए जाया करते थे। इसके बावजूद शर्मा को कोई भनक तकनहीं लगी कि वहां इतना सब कुछ चल रहा था? डॉक्टर लक्ष्मी और डॉक्टर मीनाक्षी भी महिला डॉक्टर के तौर पर वहां जाती थीं, लेकिन उन्होंने भी कभी कोर्ठ आपत्ति नहीं जताई।

बच्चियों के बयान को नजरअंदाज नहीं कर सकते
मुजफ्फरपुर के पुलिस अधिकारी मुकुल कुमार रंजन कहते हैं कि टिस की रिपोर्ट एकमात्र आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि टिस की रिपोर्ट के अलावे बच्चियों ने जज के सामने जो बयान दिया है उसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता है। बच्चियों ने जज के सामने कहा है कि उनके प्राइवेट पार्ट पर चोट की जाती थी और सुबह उठती थीं तो उनकी पैंट बदन से अलग होती थी।

दफनाई गई लड़की की तलाश में खुदाई
मुजफ्फरपुर की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरप्रीत कौर ने कहा कि रेप का विरोध करने पर एक बच्‍ची को मारकर जमीन में गाड़ दिया गया। आश्रय गृह की खुदाई का काम उक्‍त लड़की के बयान के आधार पर हो रहा है। जिस जगह पर खुदाई की जा रही है उस जगह की पहचान उस लड़की ने ही की है। उन्‍होंने कहा कि खुदाई के दौरान अब तक कुछ भी अहम सबूत नहीं मिला है। आरोप लगाने वाली लड़की से और पूछताछ करने के बाद खुदाई का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

सीएम को देनी पड़ी सीबीआई जांच की मंजूरी
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर बाल आश्रय गृह में हुए यौन शोषण कांड की जांच सीबीआई को दे दी है। इस सम्बंध में जरूरी आदेश जारी किया जा चुका है। माना जा रहा है कि सीबीआई जांच का आदेश देने का फैसला सीएम नीतीश कुमार ने इस मामले में हर दिन एक नया खुलासा होने के बाद किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि जांच का आदेश दबाव में दिया गया है। उनका कहना है कि नीतीश कुमार ने विपक्ष के सदन से सड़क तक आंदोलन के कारण फैसला लिया है। जांच का आदेश देने के पीछे इस मामल में मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति का नाम आने की वजह से दिया गया है।

चालबाजी के तहत चल रहा था एनजीओ
पुलिस अधिकारी मुकुल रंजन का कहना है कि ब्रजेश ठाकुर ने एनजीओ को चलाने में बहुत चालाकी की है। उन्होंने कहा कि बृजेश किसी रमेश ठाकुर के नाम से एनजीओ सेवा संकल्प चलता है। जांच में अब तक रमेश ठाकुर नाम का कोई व्यक्ति सामने नहीं आया है। लगता है कि ब्रजेश ठाकुर ने ही अपना नाम यहां रमेश ठाकुर कर लिया है।