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कठुआ गैंगरेपः नाबालिग आरोपी को रटाई कहानी, पुलिस के भी शामिल होने का शक

इस मामले में अब पुलिस वाले भी खुद घिरते नजर आ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस मामले में नाबालिग ने जम्मू-कश्मीर पुलिस को जो कहानी सुनाई, उसे ही जांच एजेंसी के सामने भी दोहराई।

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कठुआ गैंगरेपः नाबालिग आरोपी को रटाई कहानी, पुलिस के भी शामिल होने का शक

नई दिल्ली। देशभर को हिला देने वाले कठुआ गैंगरेप केस में मामला धीरे-धीरे सुलझता नजर आ रहा है। पुलिस, जांच एजेंसियों, केस से जुड़े तथ्यों और लोगों, नाबालिग आरोपी आदि की प्रत्यक्ष-परोक्ष मदद से मामले की गुत्थी धीरे-धीरे सुलझती जा रही है, हालांकि अभी भी दोषियों के नाम सामने नहीं आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले में अब पुलिस वाले भी खुद घिरते नजर आ रहे हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस मामले में नाबालिग ने जम्मू-कश्मीर पुलिस को जो कहानी सुनाई, उसे ही जांच एजेंसी के सामने भी दोहराई।

...ऐसे खुल रहे राज

क्राइम ब्रांच को बार-बार बिना हावभाव बदले सुनाई जा रही इस कहानी से संदेह हुआ। नाबालिग ने दावा किया था बच्ची को अगवा किए जाने के बाद कई दिनों तक एक गोशाला में रखा गया था। जांच एजेंसी के मुताबिक, 'यह गोशाला नाबालिग के मामा और केस के सह-आरोपी सांझीराम के घर के पास है और उस मंदिर से कुछ ही दूरी पर है, जहां बच्ची को असल में कैद किया गया था। दावों की पड़ताल के लिए एजेंसी ने सारी घटना को एक नाटकीय रुप में दोहराया। एक शख्स को गोशाला में बंद कर चिल्लाने को कहा गया तो चिल्लाने की आवाज बाहर तक आ रही थी। ऐसे में पड़ोसियों तक आवाज न पहुंचना भी असंभव था।

...इन दावों में विरोधाभास

- नाबालिग का दावा था कि बच्ची के हाथ बांध रखे थे, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट में बच्ची की कलाइयों पर कोई निशान नहीं पाए गए।
- पुलिस के सिपाही नाबालिग को अपराधी साबित करने में लगे रहे, लेकिन जांच एजेंसी के पास को एक गवाह ने बताया कि नाबालिग ने यह दावा करते हुए अपराध स्वीकार किया था कि वह छूट जाएगा। इस गवाह को नाबालिग ने कथित तौर पर कहा था, 'मामा की पुलिस में सेटिंग है।'
- बच्ची के कपड़ों पर लगा खून साफ करने के बाद पुलिस को भरोसा था कि दूसरे आरोपियों की भूमिका का पता नहीं चलेगा, लेकिन फोरेंसिक जांच में बच्ची के कपड़ों पर किसी तरह का दाग ना होने के चलते शक हुआ था।
- प्राप्त जानकारी के मुताबिक दत्ता से मिलकर सांझीराम ने बच्ची को नाबालिग के जरिए अगवा करने की साजिश रची थी। इस मामले में नाबालिग के जरिए बचने की योजना थी क्योंकि कानून के मुताबिक नाबालिग होने के चलते उसे सिर्फ तीन साल बाल सुधार गृह में बिताने पड़ते।