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देश मेें ‘पहली बार’ दो पुलिसवालों को सुनाई गई सजा-ए-मौत, हिरासत में गई थी युवक की जान

तिरुवनंतपुरम में सीबीआई की विशेष अदालत ने 13 साल पुराने हिरासत में मौत के मामले में दो पुलिसवालों को मौत की सजाई सुनाई है, संभवता यह देश का पहला ऐसा मामला है।

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Kerala UdayKumar Death in Police Custody

Kerala UdayKumar Death in Police Custody

तिरुवनंतपुरम। शायद यह पहला मामला होगा जिसमें दो पुलिसवालों को सजा-ए-मौत दी गई हो। यह ऐतिहासिक फैसला हिरासत में हुई एक युवक की मौत के 13 वर्ष पुराने मामले में केरल की विशेष सीबीआई अदालत ने बुधवार को सुनाया। अदालत ने 27 वर्षीय युवक की हिरासत के मामले में छह पुलिसवालों को दोषी करार दिया था।

सीबीआई अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा ठीक उस वक्त आई है जब राजस्थान के अलवर में रकबर खान की मौत को कथितरूप से पुलिस की पिटाई से होना माना जा रहा है। राजस्थान के गृह मंत्री ने कहा है कि रकबर की मौत पुलिस हिरासत में हुई जबकि राज्य के पुलिस महानिदेशक ने इसे फैसले में हुई चूक माना है।

बता दें कि 27 वर्षीय उदयकुमार को केरल पुलिस ने सितंबर 2005 में चोरी के एक मामले में पकड़ा था लेकिन बाद में बेगुनाह पाए जाने पर उसे छोड़ दिया गया था। हालांकि, जब उसने पुलिस से उसके पास मौजूद 4,000 रुपये वापस करने के लिए कहा तो तिरुवनंतपुरम स्थित फोर्ट पुलिस स्टेशन के दो पुलिसवाले उसे थाने ले आए और शारीरिक यातनाएं दीं।

सीबीआई की विशेष अदालत के जज जे नसीर ने अपने फैसले में सब इंस्पेक्टर जे जीतकुमर और एसवी श्रीकुमार को सजा-ए-मौत देते हुए कहा, "यह दोनों आरोपियों द्वारा की गई क्रूर और नीचतापूर्ण हत्या है... निश्चित है कि दोषियों के इस कृत्य से पुलिस विभाग जैसी संस्था की प्रतिष्ठा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा... और अगर किसी संस्था पर से लोगों को भरोसा उठ जाता है, तो यह समाज के लोक आदेश और कानून एवं व्यवस्था को प्रभाव करेगा जोकि एक बहुत खतरनाक स्थिति है।"

अदालत ने अपने फैसले में इन दोनों पुलिसकर्मियों पर 2-2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। वहीं, अदालत ने टीके हरिदास, ईके साबू और अजीत कुमार नामक तीन पुलिसकर्मियों को साजिश रचने और सबूत मिटाने के जुर्म में 3-3 साल के कारावास की सजा सुनाई है। हरिदास फिलहाल एसपी हैं जबकि अन्य दो एसपी रह चुके हैं। इससे पहले मंगलवार को सीबीआई की अदालत ने 2005 में पुलिस हिरासत में हुई 27 वर्षीय युवक की मौत के मामले में सभी छह पुलिस अधिकारियों को दोषी पाया था। दोषी 6 पुलिसवालों में से एक की सुनवाई के दौरान मौत भी हो चुकी है।

पुलिस के मुताबिक 27 सितंबर 2005 को तिरुवनंतपुरम के फोर्ट थाने की पुलिस ने 27 वर्षीय उदयकुमार और उसके दोस्त सुरेश को श्रीकांतेश्वरम पार्क से इसलिए उठाया क्योंकि उनके पास से उन्हें 4,500 रुपये मिले थे। दोनों पर चोरी करने का आरोप लगाते हुए पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस ने विशेषरूप से उदयकुमार को शारीरिक रूप से ज्यादा पीटा ताकि वो जुर्म कबूल ले।

कथितरूप से उदयकुमार के पैरों पर जमकर लाठियां बरसाई गईं और उसकी जांघों के ऊपर भारी लोहे की रॉड चलाई गई। पुलिस की पिटाई से हुई उसकी मौत को स्थानीय मीडिया द्वारा 'उरुत्ती कोला' कहा गया। इस घटना से न केवल पुलिस द्वारा अपनाए जाने वाले थर्ड डिग्री टॉर्चर का खुलासा हुआ, बल्कि तत्कालीन सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को भी काफी बदनामी का सामना करना पड़ा था।

बीते 13 वर्षों के दौरान पहले पुलिस द्वारा की गई जांच और फिर सीबीआई जांच से इस मामले में कई उतार-चढ़ाव आए। इनमें प्रत्यक्षदर्शियों का विरोधाभासी होना और दस्तावेज में हेराफेर कर आरोपी पर डकैती की धारा लगाना भी शामिल रहा। हालांकि, सीबीआई अदालत का फैसला उदयकुमार की मां प्रभावती के लिए काफी सुकून लाने वाला रहा, क्योंकि वो एक दशक से भी ज्यादा वक्त से मुकदमा लड़ रही थीं।

दोषी पुलिसवालों में 2005 में उदयकुमार को हिरासत में लेने वाले कॉन्सटेबल के जितुकुमार, एसवी श्रीकुमार, तत्कालीन सब इंस्पेक्टर टी अजीत कुमार, तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर ईके साबू और तत्कालीन सहायक आयुक्त टीके हरिदास समेत कॉन्सटेबल केवी सोमन (मुकदमे के दौरान मौत हो गई) शामिल हैं।