Punjab: Shaurya Chakra-awardee Balwinder Singh की हत्या, पत्नी ने सरकार को ठहराया जिम्मेदार

  • Shaurya Chakra-awardee Balwinder Singh की अज्ञात हमलावारों ने गोली मारकर हत्या कर दी
  • घटना राज्य के तरण तारण जिले की है। घटना से बलविंदर के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी रोष

By: Mohit sharma

Updated: 17 Oct 2020, 04:57 PM IST

नई दिल्ली। पंजाब में सिख आतंकवाद ( Sikh terrorism in Punjab ) से लोहा लेने वाले और बहादुरी के लिए शौर्य पुरस्कार से सम्मानित बलविंदर सिंह भिखीविंड ( Shaurya Chakra-awardee Balwinder Singh ) की अज्ञात हमलावारों ने गोली मारकर हत्या कर दी। घटना राज्य के तरण तारण ( Tarn Taran ) जिले की है। घटना से बलविंदर के परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी रोष है। यहां तक कि घटना से आक्रोशित परिजनों ने बलविंदर का अंतिम संस्कार करने से भी इनकार कर दिया है। बलविदर की पत्नी जगदीश कोर का कहना है कि उसका पति देश के लिए कुर्बान हुआ है, इसलिए उसको शहीद का दर्जा दिया जाना चाहिए।

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रकार, प्रशासन औ खुलिया एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया

वहीं, बलविंदर की हत्या को लेकर प्रशासन और सरकार पर भी सवालिया निशानों के घेरे में आ गई है। परिजनों का कहना है कि हमारे परिवार पर हमलों के 42 एफआईआर है, इसलिए सरकार द्वारा सुरक्षा का वापस लिया जाना गलत फैसला था। परिजनों ने इसके लिए सरकार, प्रशासन औ खुलिया एजेंसियों को जिम्मेदार ठहराया है। परिजनों का कहना है कि हमने सरकार और प्रशासन से कई बार सुरक्षा मुहैया कराए जाने की गुहार लगाई, लेकिन हमारी मांग की अनदेखी की गई। उनका यह भी आरोप है कि सुरक्षा को केवल अपने स्टेटस सिंबल से जोड़ने वालों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है, लेकिन जिसको इसकी वास्तव में जरूरत है। उसकी गुहार पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

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प्वांइट ब्लैंक रेंज से गोली मारी गई

वहीं मृतक बलविंदर सिंह की बेटी प्रणप्रीत कौर का कहना है कि अगर हमें सुरक्षा मिली हुई होती तो आज यह दिन न देखने को मिलता। प्रणप्रीत ने कहा कि हमनें इसबारे में सरकार को कई बार ईमेल, लिखित आवेदन भेजे लेकिन हमारी कोई सुनवाई नहीं हुई। आपको बता दें कि बलविंदर को उनके होमटॉउन भिखीविंड में सुबह 7 बजे प्वांइट ब्लैंक रेंज से गोली मारी गई। उनको पांच गोलियां लगी थीं। भिखीविंड तरण तारण शहर से 35 किलोमीटर दूर है। यह वही स्थान है जहां 80 और 90 के दशक में आतंकवाद चरम पर था। उन्हें 1993 में शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था।

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