
अचार चिरौजी से सूखे की भरपाई
मडिय़ादो. बफर के जंगल में इन दिनों आचार चिरौंजी की बहार है। अचार के पेड़ चिरौंजी फल से लदे हुए हैं। जो वनांचल क्षेत्र के आदिवासियों को आय का जरिया साबित हो रहे हैं।
जानकारी के अनुसार बीते वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष मडिय़ादो के जंगलों में जम कर अचार के पेड़ में फल आए थे, लेकिन अचार के फलों को पकने के पहले ही आदिवासियों ने तोडऩा प्रारंभ कर लिया जिस कारण अचार के अंदर चिरोजी कमजोर रह जाएगी। जिसका उचित भाव नहीं मिलेगा। क्योंकि व्यापारियों के द्वारा बाजार में चिरौंजी के लिए ही आचार फल की गुठली खरीदते हंै। जब गुठली के अंदर चिरौजी ही कमजोर निकलेगी तो निश्चित भाव पर असर पड़ेगा।
कुछ साल पहले तक अचार की गुठली का पकने तक इंतजार किया जाता था, जिसके लिए वन समितियों के सदस्य और गांवों के आदिवासी स्वयं संगठन बना कर जंगलों की रखवाली कर अचार पकने का इंतजार किया करते थे।
लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं हुआ है। आशाराम आदिवासी, रतिराम आदिवासी का कहना है कि लोग रात में चोरी छिपे कच्चे आचार तोड़ रहे थे। जंगलों में बड़ी संख्या में अचार गुठली चोरी छिपे उजाड़ कर दी गई। जिसके चलते अन्य लोगों ने चोरों से फसल बचती नहीं देख अपना नुकसान देखते हुए अचार तोड़ लिया। गुठली कच्ची होने के कारण निश्चित नुकसान हुआ है।
फिर भी नहीं घाटा
वनांचल क्षेत्र के आदिवासी हरिराम, परम, जाहर आदिवासी का कहना है कि अचार गुठली की मांग अच्छी है जिसके चलते भाव अच्छे मिल रहे है। फिलहाल कम जोर किस्म की आचार गुठली 60 रुपए किलो से लेकर 80 रुपए तक बिक रही है। पकी अचार की गुठली का भाव 100 रुपए से अधिक है।
Published on:
10 May 2019 01:54 pm
बड़ी खबरें
View Allदमोह
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
