
Electric wires
दमोह। शहर में बिजली की लाइन बिछाते समय लोगों की सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा गया है। स्थिति यह है कि कई जगह हाईटेंशन लाइनें सड़कों को क्रॉस कर रही हैं। इन स्थानों पर विद्युत निगम की ओर से गार्डिंग नहीं कराई गई है। तार टूटने की स्थिति में बड़ा हादसा होने की संभावना हर समय बनी रहती है। वहीं शहर में कई जगह बिजली के तार झूल रहे हैं।
शहर के हृदयस्थल कहे जाने वाले घंटाघर, जो पुरात्तव की धरोहर भी कही जा सकती है, यह स्थल दिनोंदिन अपने वास्तविक स्वरूप को खोता जा रहा है। दरअसल घंटाघर के चारों तरफ लोगों द्वारा अपने प्रतिष्ठानों, अपने कार्यक्रमों, धार्मिक आयोजनों के पंपलेट चिपका दिए जाते हैं, तो कई बार यहां पर शराबी तत्व यहां स्थापित प्रतिमा को नुकसान पहुंचा देते हैं। घंटाघर की दुर्दशा सिर्फ इतने तक ही सीमित नहीं है।
चोरों तरफ बिजली के तार
सबसे खराब स्थिति घंटाघर को दूर से अथवा ऊंचाई से देखने पर सामने आती है। दूर से देखने में घंटाघर बिजली तारों, केबलों के सहारे झूलता नजर आ रहा है घंटाघर की ऊपरी मंजिल के चारों तरफ बिजली तारों, इंटरनेट, टीवी केबल बंधी हुई हैं। जिससे घंटाघर इन तारों केबलों के सहारे झूलता प्रतीत हो रहा है। जर्जर बिजली के तारों से अक्सर घटनाएं होती रहती हैं। बंदर पूरे दिन तारों पर झूलते रहते हैं। जिससे बिजली के तार अक्सर टूट जाते हैं। तार तेज हवा व आंधी के समय वह आपस में टकराते हैं। जिससे स्पार्किंग होने से चिंगारिया निकलतीं हैं। जिससे आग लगने का खतरा भी बना रहता है।
सबसे प्रमुख बात यह है कि शहर की सबसे पुरानी पहचान होने के बाद भी इस घंटाघर की दुर्दशा को रोकने के लिए न ही किसी राजनीतिक का ध्यान गया है और न ही समाजसेवी संस्था, या प्रशासन द्वारा ध्यान दिया गया है।
Published on:
02 Dec 2021 05:14 pm
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