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6 साल बाद फिर मिल गया महामस्तकाभिषेक का मौका

बड़े बाबा का महास्तकाभिषेक करने लग गई श्रावकों की कतारें

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 Got the chance of Mahamastakabhishek again after 6 years

Got the chance of Mahamastakabhishek again after 6 years

दमोह. कुंडलपुर महामहोत्सव का दूसरा चरण महामस्तकाभिषेक का शुभारंभ गुरुवार की दोपहर 2 बजे से शुरू हुआ। शाम 5.३० बजे तक दो हजार से अधिक श्रद्धालु मस्काभिषेक का पुण्य लाभ अर्जित कर चुके थे, इसके बाद भी लंबी कतार लगी हुई थी। आपको बता दें कुंडलपुर में बड़े बाबा के मस्तकाभिषेक का मौका 6 साल बाद मिल गया है, जबकि श्रवण गोला में 12 साल बाद यह मौका मिलता है, हालांकि इसके बाद 9 साल बाद कुंडलपुर में मस्तकाभिषेक का मौका मिलेगा।
प्रिंट मीडिया प्रभारी महेंद्र जैन सोमखेड़ा ने बताया कि महामस्तकाभिषेक के शुभारंभ पर अलौकिक वातावरण निर्मित हुआ। जब प्रथम कलश से प्रतिमा के मस्तक पर अभिषेक किया गया तो उपर से गिरते जल को हवा ने फुहारों में बदल दिया और पूरा माहौल अप्रतिम सा लगा। इस दृश्य के साक्षी बने हजारों श्रद्धालुओं को असीम आनंद की प्राप्ति हुई। लोग लंबे समय से भगवान बड़े बाबा के मंदिर निर्माण पूर्ण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। जो पूर्ण होने से अपने आप को धन्य मान रहे हैं।
प्रथम महामस्तकाभिषेक करने का सौभाग्य अशोक पाटनी परिवार को प्राप्त हुआ। निर्यापक मुनि पुंगव सुधासागर ने अभिषेक क्रिया का शुभारंभ कराया। निर्यापक मुनि योग सागर महाराज ने शांतिमंत्रों की शांतिधारा प्रारंभ कराई। शांतिधारा करने का सौभाग्य रतनलाल, कंवरलाल, अशोक कुमार पाटनी को प्राप्त हुआ। शांतिधारा के पश्चात क्रमश: अनेक श्रेष्ठीजनों ने बड़े बाबा का महामस्तकाभिषेक किया। इसके बाद श्रावकों ने कतार में लगकर मस्तकाभिषेक किया, शाम 5.३० बजे तक लगभग 2 हजार से अधिक श्रद्धालु अभिषेक कर चुके थे, इसके बाद भी कतारें लगी हुईं थीं।
विशेष स्थान से कर रहे थे अभिषेक
कुंडलगिरी पर्वत पर भगवान आदिनाथ बड़े बाबा की 15 फुट ऊंची भव्य विशाल पद्मासन प्रतिमा का महामस्तकाभिषेक करने के लिए सिर तक सीढिय़ां बनाई गईं थीं। श्रद्धालु कलश लेकर जब ऊपर से जल अर्पित कर रहे थे, तब फरवरी की चमकते वसंत के दिन में इतनी उंचाई पर हवा तेजी से बह रही थी। पत्थरों से निर्मित मंदिर में हल्की गर्माहट के बीच हवा के ठंडे झौंके से वातावरण में उठ रही सुंगध अतिशयकारी क्षेत्र में लोगों बड़े बाबा के जयकारे लगाने के लिए प्रेरित कर रही थी। यहां पहुंच रहे श्रावकों को सृष्टि की विशालता के आगे छोटे, बहुत छोटे होने का एहसास हो रहा है। मान, अंहकार, दुनियादारी से दूर एक अजीब सी शांति का अनुभव इस अतिशयकारी बड़े बाबा के समक्ष मिलता है।
अष्टानिका पर्व 18 मार्च तक जारी रहेगा
बड़े बाबा की प्रतिमा का 6 साल बाद एक बार फिर महामस्तकाभिषेक हो रहा है, जो अनवरत अष्टानिका पर्व तक चल सकता है, ऐसे संकेत आचार्यश्री विद्यासागर महाराज की दिव्य देशना में मिले हैं। आचार्यश्री के सान्निध्य में शुरु हुए महामस्तकाभिषेक में जयकारों के बीच, पवित्र जल के कलशों से किया गया। यह दृश्य इतना आलौकिक था, जो शांति और जैन धर्म के अहिंसा के सिद्धांत को प्रतिपादित करता है। अहिंसा से सुख, त्याग से शांति, मैत्री से प्रगति और ध्यान से सिद्धि मिलती है। विशाल और ओजस्वी प्रतिमा के दर्शन करने सभी श्रद्धालु मन में शुद्ध भाव लेकर आते हैं। उन्हें अपने आप ही सफलता प्राप्त होती है। आगामी महामस्तकभिषेक 2031 में होगा। जैसे भगवान बाहुबली का श्रवणबेलगोला में 12 वर्ष में महामस्तकाभिषेक विशाल रूप में आयोजित किया जाता है। उसी तरह कुंडलपुर में भी हर साल 9 वर्ष बाद आयोजन होगा।
25 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे
कुंडलपुर महामस्तकाभिषेक का विधिवत शुभारंभ दोपहर में किया गया। सुबह से पहुंचे श्रावकों ने पहले आचार्यश्री व मुनिसंघ की आहारचर्या के दर्शन किए। इसके बाद महामस्तकाभिषेक व शांतिधारा पूजन देखने का मौका मिला। अब श्रद्धालुओं को आसानी से बगैर रोकटोक के दर्शन हो रहे हैं।
शरीर के प्रति राग, आग की भांति हमें जला रही: आचार्यश्री
आचार्यश्री विद्यसागर महाराज ने अपनी मंगलवाणी में कहा कि आज सभी बड़े बाबा के दूर से ही दर्शन कर रहे हैं। विज्ञान के माध्यम से देख रहे हैं। उसका अनुभव होता है। यह भावना और आगे बढ़ती जाए। आचार्यश्री ने कहा कि जिनेंद्र भगवान आपके दर्शन से मेरे जीवन की सभी दाह मिट जाए, वह राग ही दाह है। शरीर के प्रति राग आग की भांति हमें जला देती है। प्रभु हमारी इस राग की आग को शांत करें। प्रबंधकों ने जिनके कल्याणक हुए थे। बहुत दिन से प्रतीक्षा थी। अब प्रतीक्षा समाप्त हो गई है, कोई रोक टोक नहीं है।