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माता-पिता की मौत, पत्नी-बच्चे भी छोड़ गए, मामी सरपंच फिर भी मौत के बाद श्मशान नसीब नहीं, पत्थरों से दबाया शव

MP News: लाचारी और गरीबी किस कदर इंसान को तोड़ देती है, इसका जीता जागता उदाहरण शनिवार को दमोह जिले के मड़ियादो क्षेत्र के पाठा गांव में देखने मिला। एक लकवाग्रस्त युवक की बीमारी से लड़ते-लड़ते मौत हो गई लेकिन उसे न श्मशान नसीब हुआ न चिता।

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दमोह

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Avantika Pandey

Sep 28, 2025

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MP News

MP News: लाचारी और गरीबी किस कदर इंसान को तोड़ देती है, इसका जीता जागता उदाहरण शनिवार को दमोह जिले के मड़ियादो क्षेत्र के पाठा गांव में देखने मिला। एक लकवाग्रस्त युवक की बीमारी से लड़ते-लड़ते मौत हो गई लेकिन उसे न श्मशान नसीब हुआ न चिता। गरीबी के चलते शव को चट्टानों के बीच पत्थरों से धंककर छोड़ दिया गया। इस घटना ने दिल को झकझोर कर रख दिया।

पत्नी- बच्चे भी छोड़कर चले गए

जानकारी अनुसार लकवा पीड़ित मिलन के पिता पहले ही गुजर चुके थे, मां भी 15 साल पहले दुनिया छोड़ गईं थी। विवाह हुआ, लेकिन पत्नी व बच्चे भी छोड़कर चले गए। नौ साल तक भटकते रहने के बाद जब वह हाल ही में मड़ियादो लौटा तो उसका शरीर पहले से ही बीमारी और लाचारी से ग्रसित था। बीमारी से जूझते हुए मिलन ने दम तोड़ दिया। मिलन की बुजुर्ग मामी सरपंच हैं, उनकी स्थिति दयनीय है। इस स्थिति में नहीं थी कि अंतिम संस्कार किया जा सके। इसलिए मिलन के शव को चट्टानों के बीच ढंककर छोड़ दिया गया। हालांकि जैसे ही यह खबर समाजसेवियों को लगी, उन्होंने पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने शव को चट्टानों से बाहर निकाला। रविवार को मिलन का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

पुलिस ने शव को निकाला, पीएम के लिए भेजा

बीमारी से जूझते-जूझते जब मिलन ने दम तोड़ा तो रिश्तेदारों के पास अंतिम संस्कार के लिए पैसे नहीं थे और व्यवस्था नहीं कर पाए। मजबूरी में शव को गांव से सटी पहाड़ी पर ले जाकर पत्थरों के बीच छोड़ दिया। जानकारी लगने पर समाजसेवियों ने प्रशासन से गुहार लगाई। शनिवार को पुलिस मौके पर पहुंची और शव को चट्टानों के बीच से बाहर निकाला गया। शव को पीएम के लिए हटा अस्पताल भेजा गया है। रविवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा।

वृद्धा ने जोड़े हाथ

जानकारी मिलने पर जब अधिकारी मिलन के रिश्तेदार के यहां पहुंचे तो उसकी वृद्ध मामी मिलीं। वह गांव की सरपंच हैं, उन्होंने हाथ जोड़कर अधिकारियों से कहा, वह अत्यंत गरीब है। इस हालत में नहीं कि भांजे का अंतिम संस्कार कर सके। पुलिस वाले ही कर दें।

पत्रिका व्यू… एक सवाल छोड़ गया मिलन

मिलन अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी कहानी समाज के सामने बड़ा सवाल छोड़ गई है। क्या वाकई किसी इंसान की मौत इतनी बेबस हो सकती है कि उसके अंतिम संस्कार के लिए भी सहारा न मिले? क्या समाज में संवेदनाएं इतनी कठोर हो गई हैं कि गरीबी से जूझते लोग पत्थरों के नीचे दफन कर दिए जाएं? मिलन का जीवन और मृत्यु अब हर किसी को झकझोर रही है। क्योंकि, उसे न जिंदगी ने सहारा दिया और न मौत ने सम्मान दिया।