. शरीर से अपंग होने के बाद लोगों का हौसला जवाब दे जाता है। इसके बावजूद एक 12 वर्षीय बालक बलराम लोगों की शाबाशी बटोर रहा है। नि:शक्त होने के बाद भी बलराम ने अपनी मां की जरुरतों को महसूस करते एक शौचालय बना दिया।
जोड़ातड़ई पंचायत में खुले में शौचमुक्त होने का उत्सव मनाया जा रहा था। बलराम आस-पास की पंचायत में रहने वालों के लिए रोल मॉडल बन गया। बलराम ने बातचीत के दौरान बताया कि गांव वाले सभी शौचालय बना रहे थे, उसे भी लगा कि अपनी मां के लिए शौचालय बनाकर दे।
फिर क्या था खुद ही खोदा गड्ढा और अपने सिर से ढोया बालू और पानी, बना दिया मां के लिए शौचालय। कलक्टर केसी देवसेनापति ने भी महज 12 वर्ष के इस बालक के जज्बे को सलाम किया। कहा वाकई हौंसला बड़ा होता है।
बलराम बहुत बड़ा उदाहरण है, पंचायत का रियल हीरो है। इस कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष सुनीता भास्कर, जिपं उपाध्यक्ष मनीष सुराना, जिपं सीईओ जे श्रीराम व अन्य मौजूद थे।
पढऩे की ललक
पत्रिका टीम ने जब इस बच्चे के मन को टटोला, तो उसके मन से कई बातें निकलकर बाहर आईं। उससे पूछा पढऩा चाहोगे, तो उसका जवाब था हां। दो माह सक्षम जावंगा में पढ़ा भी है। मां की समस्याओं और उनके आग्रह ने पढऩे नहीं दिया।
इतना ही नहीं इस बच्चे की मेहनत और लगन देख जिला पंचायत अध्यक्ष कमला विनय नाग को भी माओवादियों की मांद में जाने से कोई रोक नहीं सका। बच्चे को आश्वासन दिया कि वह सक्षम में फिर से भर्ती कराएंगी।
सभी घरों को खुले में शौचमुक्त
और कलक्टर केसी देवसेनापति भी गांव में घर-घर घूमे। बने शौचालयों को निरीक्षण किया। खुले में शौचमुक्त करने में लगी टीम से गांव की पूरी जानकारी ली है। इस पंचायत में 187 घर हैं। इन सभी घरों को खुले में शौचमुक्त कर दिया गया है।
अब कोई भी व्यक्ति बाहर नहीं जाता है। यदि कोई बाहर जाते पाया गया तो 100 रुपए का अर्थदंड पंचायत को देना होगा।