
अस्पताल में घटना के बाद बिलखते परिजन। फोटो: पत्रिका
Dausa Bus Fire: दौसा। बांदीकुई दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे पर धनावड़-कोलवा के समीप ऋषिकेश से इंदौर (मध्यप्रदेश) जा रही हंस ट्रेवल्स की सवारियों से भरी स्लीपर बस बुधवार तड़के करीब ढाई बजे ओवरटेक करते समय एक ट्रेलर से टकरा गई। टक्कर के बाद बस में भीषण आग लग गई। हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 यात्री घायल हो गए। बताया जा रहा है कि छह लोग जिंदा जल गए, जबकि दो घायलों ने जिला अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
घायलों ने बताया कि ट्रेलर से टकराने के बाद करीब दो मिनट बाद बस में आग लगी थी यदि बस का आपातकालीन गेट खुल जाता तो शायद वे बच जाते। उन्होंने बताया कि दमकल भी समय पर पहुंच जाती तो कुछ और लोगों की जान बच सकती थी। पुलिस के अनुसार बस में कुल 37 यात्री सवार थे। मौके पर मिले शव पूरी तरह जल चुके, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल है। पुलिस ने मृतकों की पहचान के लिए डीएनए जांच कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए परिजनों के नमूने लिए जाएंगे। डीएनए रिपोर्ट आने के बाद ही मृतकों की अंतिम पहचान हो सकेगी।
भूमि भौर (20) पुत्री भारत भौर निवासी इंदौर, प्रियंका पांडे (35) पत्नी जितेंद्र पांडे निवासी खरगोन, दीपक तंवर (29) पुत्र नन्नू तंवर निवासी खरगोन, देवेंद्र (45) पुत्र नरपत सिंह, निवासी सीहोर, निर्मला गुप्ता पत्नी चंद्रप्रकाश गुप्ता, निवासी इंदौर, धर्मसिंह (31) पुत्र गुलसिंह, निवासी झाबुआ, रामावतार बस चालक (हंस ट्रेवल्स), कुलदीप परिचालक।
कालू (39), पुत्र विजिया, निवासी झाबुआ, स्वानंद गिररे, पुत्र राजेश, निवासी इंदौर, लीजा (22), पुत्री महेश, निवासी इंदौर, प्रिंस सरोज (22), पुत्र सुनील सरोज, निवासी इंदौर, नेहा (26), पत्नी सनी, निवासी खरगोन, याशिका (3), पुत्री सनी, निवासी खरगोन, अनिता (56), पत्नी सी.एम. सैनी, निवासी खरगोन, योगिनी (21), पुत्री शैलेन्द्र पाटीदार, निवासी खरगोन, घीसूलाल (65), पुत्र बलवंत सिंह, निवासी सीहोर, माहिर मोटिने (18), पुत्री मनीष, निवासी इंदौर, प्रदीप (26), पुत्र नरेंद्र, निवासी इंदौर, मिहिर पांचाल, पुत्र कमल पांचाल, निवासी इंदौर सहित अन्य यात्री घायल हुए।
हादसे में घायल इंदौर निवासी आदित्य ने बताया, जोरदार झटका लगा और स्लीपर बर्थ पर सो रहे यात्री नीचे गिर गए। जो लोग गेट के पास थे, वे किसी तरह बाहर निकल गए, लेकिन पीछे बैठे यात्री फंस गए। इमरजेंसी गेट खुल जाता तो शायद सभी की जान बच सकती थी।
'मां, तू रो मत… मैं हूं ना। पापा जरूर आएंगे। करीब चार साल का मासूम अपनी मां दिव्या को ढांढस बंधा रहा था। यह देख अस्पताल के वार्ड में मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। पति दीपक को खो चुकी दिव्या कभी बेसुध होकर अधिकारियों से गुहार लगाती रहीं तो कभी ईश्वर को याद करती रहीं। वह बार-बार यही कहती रहीं कि कोई उनके पति को वापस लौटा दे। दिव्या का परिवार देहरादून घूमने गया था। इसके बाद वे इंदौर लौट रहे थे।
सिहोर निवासी नरपत सिंह का कुछ दिन पहले निधन हो गया था। परिवार गम में डूबा हुआ था और परंपरा अनुसार उनकी अस्थियों के विसर्जन के लिए 45 वर्षीय पुत्र देवेन्द्र सिंह हरिद्वार गया था। अस्थि विसर्जन के बाद बस से लौटते समय देवेन्द्र सिंह जिंदा जल गया। इस घटना की सूचना मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
Updated on:
02 Jul 2026 10:48 am
Published on:
02 Jul 2026 09:42 am
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