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Morel Dam: जयपुर के दूषित पानी से एशिया के सबसे बड़े कच्चे बांध पर संकट, किसानों ने खोला मोर्चा; महापंचायत का एलान

Mahapanchayat at Morel Dam: एशिया महाद्वीप के सबसे बड़े कच्चे बांध के रूप में विख्यात मोरेल बांध के अस्तित्व और इससे जुड़े लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहे खतरे को लेकर अब क्षेत्र के किसान और आमजन पूरी तरह लामबंद होने लगे हैं।
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दौसा

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Anil Prajapat

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Jun 28, 2026

Morel-Dam-1

मोरेल बांध। ​​पत्रिका फाइल फोटो

दौसा। एशिया महाद्वीप के सबसे बड़े कच्चे बांध के रूप में विख्यात मोरेल बांध के अस्तित्व और इससे जुड़े लाखों लोगों के स्वास्थ्य पर मंडरा रहे खतरे को लेकर अब क्षेत्र के किसान और आमजन पूरी तरह लामबंद होने लगे हैं। जयपुर शहर के अमानीशाह नाले के साथ सांगानेर क्षेत्र के रंगाई-छपाई कारखानों से निकलने वाले दूषित और रसायनयुक्त पानी के लगातार मोरेल बांध में पहुंचने के खिलाफ ग्रामीणों ने आवाज बुलंद करना शुरू कर दिया है।

शनिवार सुबह बांध के समीपवर्ती भेडोली गांव के राजकीय विद्यालय परिसर में दौसा एवं सवाई माधोपुर जिले के कई गांवों के किसान प्रतिनिधियों की एक आपात बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी 1 जुलाई को मोरेल बांध पर एक विशाल महापंचायत आयोजित करने का सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया, जिसमें दौसा और सवाई माधोपुर जिले के सैकड़ों गांवों के हजारों किसान और ग्रामीण हिस्सा लेंगे।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि जयपुर की ओर से आ रहे केमिकलयुक्त दूषित पानी को तत्काल प्रभाव से मोरेल बांध में आने से रोका जाए। इस गंदे पानी के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए और इसे बांध में गिरने से पहले ही किसी अन्य स्थान पर डायवर्ट किया जाए। बैठक के अंत में पीलूखेड़ा सहित क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक गांवों के मौजिज लोगों और किसान नेताओं ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के अस्तित्व, जल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा की लड़ाई है।

मोरेल बांध पर 1 जुलाई को होगी महापंचायत

वक्ताओं ने कहा कि आगामी 1 जुलाई को मोरेल बांध पर आयोजित होने वाली इस विशाल महापंचायत में प्रत्येक घर से किसान और युवा अधिक से अधिक संख्या में पहुंचे और अपनी मजबूत भागीदारी निभाकर सरकार को सोई हुई नींद से जगाएं। उन्होंने कहा कि यदि अब भी आवाज नहीं उठाई गई, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की एक-एक बूंद जहर बन जाएगी। बैठक के बारे में जानकारी देते हुए शुभेन्दू भेडोली ने बताया कि आगामी रणनीति के लिए 21 जनों की एक कमेटी का गठन किया गया है एवं 29 जून को लालसोट व बौली में उपखंड अधिकारियों को ज्ञापन भी दिए जाएंगे।

खेती, पशुधन और इंसानी जिंदगी पर बड़ा खतरा

बैठक में मौजूद किसान प्रतिनिधियों और पर्यावरणविदों ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जयपुर की ढूंढ नदी से होते हुए मोरेल नदी के रास्ते आ रहा फैक्ट्रियों का प्रदूषित पानी अब पूरे बांध में भर चुका है। बांध पूरी तरह इस जहरीले पानी से लबालब है।किसानों ने कहा कि इस दूषित पानी से खेतों की उर्वरा शक्ति नष्ट हो रही है और फसलें खराब हो रही हैं। जहरीला पानी पीने से बेजुबान पशु बीमार हो रहे हैं और अकाल मौत का शिकार हो रहे हैं। बांध के प्रदूषित पानी से भूजल भी प्रदूषित हो रहा है, जिससे आसपास के गांवों में कैंसर, चर्म रोग और पेट की गंभीर बीमारियों का खतरा पैदा हो गया है।

पत्रिका ने उठाया मुद्दा

दौसा और सवाई माधोपुर जिलों के सैकड़ों गांवों के लिए लाइफलाइन माने जाने वाले मोरेल बांध में बीते लंबे समय से पहुंच रहे प्रदूषित पानी का समाचार राजस्थान पत्रिका ने लगातार प्रकाशित किया है।