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Dolchi Holi: डोलची से पानी की तेज बौछार, युवाओं की पीठ पर पड़ गए लाल निशान; 500 साल पुरानी अनोखी परंपरा आज भी कायम

Dolchi Holi 2026: महुवा उपखंड क्षेत्र के पावटा गांव में बुधवार को खेली गई परंपरागत डोलची होली ने एक बार फिर वीरता, आस्था और भाईचारे की मिसाल पेश की।

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दौसा

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Anil Prajapat

Mar 05, 2026

Dolchi Holi

पावटा में खेली गई डोलची होली। फोटो: पत्रिका

दौसा। महुवा उपखंड क्षेत्र के पावटा गांव में बुधवार को खेली गई परंपरागत डोलची होली ने एक बार फिर वीरता, आस्था और भाईचारे की मिसाल पेश की। तहसील मुख्यालय से करीब 9 किलोमीटर दूर हदीरा मैदान में आयोजित इस अनूठी होली में युवाओं का उत्साह चरम पर रहा। चारों ओर से खचाखच भरे मैदान और छतों पर उमड़ी भीड़ के बीच "बल्लू शहीद" और "भैरव बाबा" के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा।

करीब आधे घंटे चले इस पारंपरिक आयोजन में युवाओं पर डोलची से पानी की तेज बौछारें बरसाई गई। पानी की धार इतनी तीव्र थी कि पीठ पर लाल निशान उभर आए। प्रतिभागी पहले से ही हल्दी और तेल मलकर पहुंचे थे, फिर भी परंपरा की तीव्रता साफ नजर आई। मैदान के मध्य बुजुर्ग व्यवस्था संभाले रहे और निर्धारित समय के बाद हस्तक्षेप कर खेल को विराम दिया।

500 साल पुरानी अनोखी परंपरा

ग्रामीणों के अनुसार करीब 500 वर्षों से यह होली बल्लू शहीद की वीरता की स्मृति में मनाई जा रही है। चमड़े के पात्र 'डोलची' में पानी भरकर खेले जाने के कारण इसका नाम पड़ा। मान्यता है कि एक बार डोलची नहीं मिलने पर गांव में अकाल पड़ा था। तब से ग्रामीणों ने इस परंपरा को निरंतर निभाने का संकल्प लिया। यही कारण है कि इस आयोजन को देखने आसपास ही नहीं, अन्य जिलों और राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं।

देवर-भाभी की कोड़े मार होली

देवर-भाभी की कोड़े मार होली ने भी परंपरा को जीवंत रखा। देवरों ने पानी की बौछार की तो भाभियों ने प्रतीकात्मक कोड़े बरसाए। शाम को महिलाओं को सामूहिक रूप से मिठाई वितरित की गई। उत्सव का समापन ढोला-मारू की सवारी के साथ हुआ। मुख्य मार्गों से निकली झांकियों को देखने लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। पुलिस की ओर से शांति व्यवस्था के लिए पर्याप्त बल तैनात रहा। ग्रामीणों का कहना है कि परंपरा की इस होली में आज तक किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं हुई।