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किस्सा किले का: राजस्थान के इस किले का आज भी है पहरेदार नाग-नागिन का जोड़ा…!

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दौसा

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Nidhi Mishra

Jul 10, 2018

kissa kile ka- Dausa Mahwa fort history in Hindi

kissa kile ka- Dausa Mahwa fort history in Hindi

दौसा/जयपुर। दौसा जिले के महुवा कस्बे में करीब चार सौ वर्ष पूर्व बनाया गया प्राचीन किला देखरेख व प्रशासन की उदासीनता के चलते खंडहर में तब्दील हो चुका है। किले के आस पास की अधिकतर जमीन पर लोगों ने अतिक्रमण कर कच्चे-पक्के निर्माण भी कर लिए हैं। यहां के करणसिंह राठौड़ ने बताया कि करीब चार सौ वर्ष पूर्व कुशवाह वंश के राजा राजसिंह द्वारा किले का निर्माण करवाया था। भरतपुर की सीमा पर स्थित होने के कारण जयपुर दरबार के लिए महुवा का किला अत्यंत महत्वपूर्ण हुआ करता था। जहां भरतपुर की ओर से होने वाले आक्रमण में सबसे पहले मोर्चा महुवा किलेदार को ही सम्भालना पड़ता था, लेकिन एक बार जयपुर दरबारी सवारी और गंगा स्नान के लिए जा रही थी। इस दौरान किलेदार द्वारा समय पर उनकी अगुवाई में नहीं पहुंचने पर जयपुर दरबार ने किलेदार से सारे अधिकार छीन लिए थे। हालांकि इन अधिकारों को कुछ समय बाद पुन: लौटा दिया गया था।

कुएं में डाल दी थी तोप
किले में जय भवानी नाम की एक तोप थी। जिसे आक्रमणकारियों द्वारा ले जाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन उसे ले जाने में कामयाब नहीं हो पाए। नाकामयाबी के क्रोध में उन्होंने तोप को कुएं में डाल दिया था। इस तोप को पहले कई बार कुएं के पानी में तैरता हुआ देखा गया था। किले में शीला देवी का प्राचीन मंदिर भी है। इस इलाके में देवी की इच्छानुसार सेही का शिकार करना व सांप को मारने पर पूर्णतया पाबंदी हुआ करती थी। एक बार यहां के किलेदार ने एक सांप को मार दिया गया था। जिसके परिणाम स्वरुप किलेदार का सम्पूर्ण परिवार देवी प्रकोप का शिकार हुआ था।


रहता है नाग-नागिन का जोड़ा
कस्बेवासियों के अनुसार किले में आज भी विशालकाय नाग व नागिन का जोड़ा रहता है। जिन्हें कई बार देखा गया है। लोगों का कहना है कि सार-संभाल के अभाव में किला आज पूर्ण रूप से अपना अस्तित्व खो चुका है। लोग किले के पत्थर व पट्टियों को उतार कर ले गए हैं। इसके चलते यहां केवल किले का नाम ही रह गया है।

बने हैं मंदिर व स्कूल
वर्तमान में महुवा किले के भीतर तीन मंदिर एक सरकारी विद्यालय बने हुए हैं। हालांकि इन मंदिरों में लोगों की आवाजाही बनी रहती है, वहीं इस स्कूल में भी सैकड़ों बच्चे पढ़ने के लिए आते हैं।