
बेटे रोहित मीना के साथ खेत में बैठी मां काली देवी
लालसोट। श्यामपुरा कलां ग्राम पंचायत के गांव भारमल का बास निवासी रामकिशन मीना अपने परिवार का जैसे तैसे खेती-बाड़ी करते हुए गुजर-बसर कर थे, करीब 21 साल पहले तबीयत बिगड़ने के बाद उनकी असमय मौत से परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया, लेकिन स्व. रामकिशन मीना की पत्नी काली देवी ने हालात का डटकर मुकाबला करते हुए पूरे परिवार को काबिल बना दिया।
सन 2004 में पति रामकिशन मीना की मौत के बाद काली देवी ने परिवार का गुजर बसर करना शुरू किया। जिसने कभी कागज -कलम नहीं छुए थे, लेकिन उसका सपना था कि उनके तीन बेटे व दो बेटियां पढ-लिखकर कुछ काबिल बने। बस इसी सपने को सच करने के लिए मां काली देवी ने बकरी पालन, पशुपालन और खेती-बाड़ी करके पढना लिखाना शुरू किया। मां की मेहनत और उनके समर्पण को बेटे-बेटियों ने भी व्यर्थ नहीं जाने दिया। दिनभर पशुपालन व खेती-बाड़ी की व्यस्तता के बाद भी मां का सुबह उठते ही पहला काम होता था कि सभी बेट-बेटी नियमित रूप से स्कूल जाएं।
स्कूल के दिनों में भी जब बेटे-बेटी किसी परीक्षा या जिंदगी के इम्तिहान को लेकर अजीब-सी पशोपेश में होते थे तो मां वह एकमात्र शख्स थी जो यह कहकर आश्वस्त कर देती थी कि 'सब कुछ अच्छा ही होगा' और वाकई सब कुछ उनके जादुई लबों की तरह अच्छा ही होता था।
इसी संबल के बूते तीनों बेटे भी मां के सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत में जुट गए। सबसे छोटे बेटे रोहित मीना ने 2010 में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की सैकण्डरी, 2012 में सीनियर सैकण्डी परीक्षा परिणाम में मेरिट में अपना स्थान बनाया एवं 2021 में राजस्थान प्रशासनिक सेवा के लिए चयनित भी हो गए। वर्तमान में वे डीग जिले के नगर में तहसीलदार के पद पर कार्यरत है। इसके अलावा दोनो बड़े बेटे प्रकाश मीना भूअभिलेख निरीक्षक के पद पर एवं पवन मीना जयपुर में ओडिट विभाग में सहायक लेखाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं।
तहसीलदार रोहित ने बताया कि मां अपने चिर-परिचित अंदाज की भांति आज भी अपने लिए कुछ नहीं मांगती और न ही किसी से कुछ अपेक्षाएं रखती हैं। आज भी वे समर्पण और त्याग की प्रतिमूर्ति बनकर जहां हमारे लिए 'मदर टेरेसा' बनकर डटी हुई है, पानी पर तैरते जिद्दी पत्थर-सी हो तुम मां।
यह भी पढ़ें
Updated on:
11 May 2025 12:59 pm
Published on:
11 May 2025 12:56 pm
बड़ी खबरें
View Allदौसा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
