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Rape Case: एसआई ही निकला दरिंदा, 4 साल की नाबालिग से बलात्कार मामले में 20 साल की सजा, ‘खाकी पर दाग लगाया’

Dausa POCSO Case: दौसा में पोक्सो एक्ट के तहत एक चार वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 2 लाख रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।

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दौसा

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Rakesh Mishra

Apr 15, 2026

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प्रतीकात्मक तस्वीर

दौसा। विशिष्ट न्यायालय (पोक्सो एक्ट) की न्यायाधीश रेखा राठौड़ ने एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में बुधवार को बर्खास्त पुलिस उपनिरीक्षक भूपेंद्र सिंह को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 2 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।

ग्रामीण क्षेत्र में थी ड्यूटी

दोषी भूपेंद्र सिंह पुत्र महेंद्र सिंह (54), मूलतः बरताई थाना कुम्हेर, जिला डीग का निवासी है। घटना के समय वह दौसा में पुलिस लाइन में उपनिरीक्षक के पद पर कार्यरत था और चुनाव के चलते ग्रामीण क्षेत्र में उसकी ड्यूटी लगी हुई थी।

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पुलिस सेवा से बर्खास्त

मामला 10 नवम्बर 2023 को जिले के एक ग्रामीण थाने में दर्ज किया गया था। परिवादी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि उसकी चार वर्षीय नाबालिग पुत्री घर के बाहर सड़क पर खेल रही थी। इसी दौरान भूपेंद्र सिंह उसे बहला-फुसलाकर एक कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद पुलिस ने मामले की जांच करते हुए आरोपी के खिलाफ पोक्सो न्यायालय, दौसा में चालान पेश किया। वर्तमान में आरोपी भूपेंद्र सिंह पुलिस सेवा से बर्खास्त चल रहा है।

33 गवाह व 46 दस्तावेज बने सजा के आधार

अभियोजन पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक (पोक्सो, दौसा) जितेंद्र कुमार सैनी ने प्रभावी पैरवी की। उन्होंने अदालत में 33 गवाहों के बयान और 46 दस्तावेज प्रस्तुत किए। न्यायालय ने पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों का अवलोकन कर आरोपी को दोषी ठहराया और उसे कठोर सजा सुनाई। न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी माना कि आरोपी का पुलिस विभाग में उपनिरीक्षक के पद पर होना और पीड़िता की उम्र घटना के समय मात्र 4 वर्ष होना अपराध को अत्यंत गंभीर बनाता है।

कोर्ट की टिप्पणी: विश्वास तोड़ा

न्यायाधीश रेखा राठौड़ ने अपने फैसले में टिप्पणी करते हुए कहा कि आमजन पुलिस पर विश्वास करते हैं। यदि पुलिसकर्मी ही इस प्रकार के कृत्य करने लगें तो जनता का भरोसा खत्म हो जाएगा। यह अपराध न केवल विश्वासघात है, बल्कि खाकी वर्दी पर भी दाग है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार का कृत्य किसी भी स्थिति में क्षमा योग्य नहीं है और समाज में सख्त संदेश देने के लिए कठोर सजा आवश्यक है।