19 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan Govt School: राजस्थान के सरकारी स्कूलों में प्रधानाचार्यों का टोटा, 10 महीने से 3800 पदोन्नत अफसरों को पोस्टिंग का इंतजार

Rajasthan Education: माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रशासनिक सुधार और विद्यालयों में नेतृत्व मजबूत करने के उद्देश्य से की गई पदोन्नतियां अब अव्यवस्था का कारण बनती नजर आ रही है।

2 min read
Google source verification

दौसा

image

Anil Prajapat

image

राजेन्द्र जैन

Mar 17, 2026

Rajasthan Govt Schools

Photo: AI generated

दौसा। माध्यमिक शिक्षा विभाग में प्रशासनिक सुधार और विद्यालयों में नेतृत्व मजबूत करने के उद्देश्य से की गई पदोन्नतियां अब अव्यवस्था का कारण बनती नजर आ रही है। राज्य में पदोन्नति के बाद 3 हजार 800 से अधिक प्रधानाचार्य पिछले करीब दस महीनों से पदस्थापन का इंतजार कर रहे है। शिक्षा विभाग अब तक उन्हें नई जगहों पर नियुक्त नहीं कर पाया है।

स्थिति यह है कि पदोन्नत प्रधानाचार्य काउंसलिंग का इंतजार करते हुए पुराने स्थानों पर ही कार्यरत है, जबकि राज्य के अनेक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद खाली पड़े हैं। इस पूरे मामले में अब पांचवीं बार प्राचार्य काउंसलिंग प्रक्रिया स्थगित कर दी गई है, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जबकि हर माह करीब 2.66 करोड़ का वेतन भुगतान किया जा रहा है।

आदेश के बाद लगी रोक

राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में दायर याचिकाओं में 16 जनवरी को पारित समेकित अंतरिम आदेश की अनुपालना में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को कार्रवाई करनी पड़ी। इसके बाद संयुक्त निदेशक (कार्मिक) ने 18 जनवरी को आदेश जारी कर 12 जनवरी को जारी काउंसलिंग आदेश को आगामी निर्देशों तक स्थगित कर दिया।

प्रशासनिक कार्यों पर असर

काउंसलिंग में देरी और तीन स्थानांतरण सूचियां जारी होने के बाद दूरस्थ जिलों के कई विद्यालयों से प्रधानाचार्य स्थानांतरित होकर जा चुके हैं, लेकिन नए प्रधानाचार्य अब तक नहीं पहुंचे। इससे विद्यालयों के शैक्षणिक प्रबंधन, प्रशासनिक कार्यों और राज्य स्तरीय परीक्षाओं की तैयारियों पर असर पड़ रहा है।

एक ही विद्यालय में कई प्रधानाचार्य

यथास्थान पदोन्नति की व्यवस्था से कई विद्यालयों में एक ही जगह पर एक से अधिक प्रधानाचार्य समकक्ष अधिकारी हो गए हैं। इससे कार्य समन्वय प्रभावित हो रहा है। कुछ स्थानों पर प्रधानाचार्य अपने पुराने अध्यापन कालांश लेने से भी बच रहे हैं, जिससे विद्यालयी अनुशासन और शिक्षण व्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

दस माह बाद भी अधर में काउंसलिंग

शिक्षा विभाग के पदोन्नत प्रधानाचार्य लंबे समय से यथास्थान कार्यग्रहण कर काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं। ऑनलाइन काउंसलिंग कार्यक्रम कई बार तय हुआ, लेकिन हर बार अंतिम समय में स्थगित करना पड़ा। अब उच्च न्यायालय के आदेश के बाद यह प्रक्रिया फिर अनिश्चितकाल के लिए टल गई है।

राज्य में प्रधानाचार्य पदों की स्थिति (1 मार्च के अनुसार)

पदस्वीकृतकार्यरतरिक्त
प्राचार्य19,40813,5765,832

राज्य के 41 जिलों में प्रधानाचार्यों के स्वीकृत एवं कार्यरत पदों का विवरण

जिलास्वीकृतकार्यरत
अजमेर285489
जैसलमेर429121
जालोर448404
अलवर484212
बालोतरा420163
झालावाड़342171
बांसबाड़ा534299
झुन्झुनू520501
बारां326165
जोधपुर645473
बाड़मेर684378
करौली309242
खैरथल311232
ब्यावर256208
भरतपुर344283
कोटा342275
भीलवाड़ा654432
बीकानेर627374
कोटपुतली-बहरोड़336306
बूंदी295193
नागौर445283
चित्तौड़गढ़457255
पाली445305
चूरू605499
फलोदी26592
दौसा433391
प्रतापगढ़28897
डीग262164
राजसमंद374205
धौलपुर325178
सवाई माधोपुर336262
डीडवाना-कुचामन20188
सीकर675601
डूंगरपुर456272
सिरोही282190
श्रीगंगानगर529407
टोंक364307
हनुमानगढ़444359
उदयपुर694442
जयपुर924909

फैक्ट फाइल

दौसा जिले में कुल उच्च माध्यमिक विद्यालय: 488
प्रधानाचार्य के पद स्वीकृत: 433
कार्यरत: 391
रिक्त पद: 42

बिना काम मिल रहा वेतन

शिक्षक संघ रेसटा ने यथास्थान कार्यग्रहण की व्यवस्था का विरोध किया है। संघ का कहना है कि इस प्रक्रिया के कारण कई अधिकारी बिना पूर्ण दायित्व के ही वेतन ले रहे हैं, जिससे राजकोष पर अनावश्यक आर्थिक भार पड़ रहा है।

जल्द समाधान निकालना चाहिए

उच्च न्यायालय में लंबित याचिकाओं के कारण प्राचार्य काउंसलिंग कार्यक्रम पांच बार स्थगित हो चुका है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को मिलकर जल्द समाधान निकालना चाहिए, ताकि पदोन्नत प्रधानाचार्यों का शीघ्र पदस्थापन हो सके।
-मोहरसिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसटा