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Success Story: कई बार फेल हो जाने के बाद भी नहीं मानी हार, IRS अधिकारी बने राजस्थान के रामभजन

जूनून और जिद दो ऐसी चीजें हैं, जिसे सही दिशा में लगाया जाए तो तमाम बाधाओं के बावजूद आप अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहते हैं। आज की कहानी में इस वाक्य को सच साबित कर दिखाया है दौसा जिले के रहने वाले रामभजन कुम्हार ने।

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दौसा

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anant awdichya

Jan 24, 2024

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दौसा। जूनून और जिद दो ऐसी चीजें हैं, जिसे सही दिशा में लगाया जाए तो तमाम बाधाओं के बावजूद आप अपने लक्ष्य को हासिल करने में सफल रहते हैं। आज की कहानी में इस वाक्य को सच साबित कर दिखाया है दौसा जिले के रहने वाले रामभजन कुम्हार ने। उनके समक्ष बाधाओं का समूह आया, हौसले को तोड़ने की कोशिश हुई। लेकिन रामभजन के जूनून को दबाने में नाकामयाब रहा। आज तमाम विपरित परिस्थियों के बावजूद उन्होंने अपने सपने को साकार किया, और एक आईआरएस अधिकारी बन, लोगों के प्रेरणा स्त्रोत बने हैं। आज की कहानी, मजदूर से अधिकारी बने रामभजन कुम्हार की…

रामभजन के शुरुआती दिन

दौसा जिले के बापी गांव के रहने वाले रामभजन कुम्हार बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उनके माता-पिता श्रम कर घर व बच्चों की जरूरतों को पूरा करने का हरसंभव प्रयास करते थे। रामभजन जब स्कूल जाने लायक हुए तो उनके पिता ने उनका नामांकन गांव के ही सरकारी स्कूल में कराया। रामभजन बचपन से ही काफी लगनशील रहे। उन्होंने 10वीं की परीक्षा पास कर 12वीं में दाखिला लिया। रामभजन अबतक परिवार की आर्थिक स्थिति को अच्छे से समझ चुके थे। उन्होंने 11वीं से ही सरकारी परीक्षाओं की तैयारियां शुरू कर दी। 12 वीं के बाद ही उनका चयन दिल्ली पुलिस में कॉन्स्टेबल के पद पर हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए वह पुलिस में नौकरी करने लगे और साथ ही UPSC की तैयारी को भी जारी रखा।

नौकरी करते हुए पास की सिविल सेवा परीक्षा

दिल्ली पुलिस में हैड कांस्टेबल के पद की तैनाती के बाद भी रामभजन अपने सपने को साकार करने में लगे थे। 3 साल की कड़ी मेहनत के बाद साल 2018 में उन्होंने पहली बार प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की, लेकिन मुख्य परीक्षा पास नहीं कर पाए। इस दौरान साल 2020 में अस्थमा अटैक के कारण उनके पिता का निधन हो गया। हालांकि, इसके बाद भी उन्होंने मेहनत जारी रखा और अपने 8वें प्रयास में वह हासिल किया जिसका सपना उन्होंने 12 वीं में देखा था। उन्हें सिविल सेवा परीक्षा 2022 में 667वां रैंक प्राप्त हुआ।

इन बाधाओं को किया पार

राम भजन ने एक साक्षात्कार के दौरान अपने जीवन की मुश्किल घड़ियों को याद किया। उन्होंने बताया कि मेरे जीवन में ऐसा भी दौर आया जब मन में कई नाकारात्मक सवाल आए। मेरे पिता मजदूर थे, मैं भी उनका साथ दिया करता था। पिताजी की कठिन परिश्रम की वजह से ही हमें पढ़ने का समय मिल सका।

उन्होंने बताया कि उनके पास खोने के लिए कुछ नहीं था, मेरे पास सामने अवसर ही अवसर थे और इसी बात ने मुझे हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। असफल होने पर मुझे बुरा लगता था, लेकिन मैंने निराश होने में समय बर्बाद नहीं किया। असफलता के बाद मैंने अपनी गलतियों में सुधार किया और अपने कमजोर क्षेत्रों पर ध्यान दिया।

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अभ्यर्थियों के लिए रामभजन की सलाह

रामभजन ने भावी अभ्यर्थियों को सलाह देते हुए कहा कि तैयारी के दौरान अनुशासन होना जरूरी है। आपको, अपने समय का बेहतर तरीके से उपयोग करना होगा। पाठ्यक्रम को अच्छी तरह समझें और प्रत्येक विषय पर ध्यान दें। उत्तर लेखन को निरंतर बेहतर करने का प्रयास करें। उन्होंने अभ्यर्थियों से कहा कि तैयारी के दौरान एकाग्रता से पढ़ाई करना बेहद जरूरी है। असफलताओं से घबराएं नहीं, सीख लेकर आगे बढ़ें और कोशिश करते रहें।

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