
मेहंदीपुर बालाजी। फोटो: पत्रिका
हिंदू नवसंवत्सर-2083 की शुरुआत 19 मार्च से होगी। रौद्र नामक इस संवत्सर में इस बार अधिकमास के कारण साल में 13 महीने होंगे। इस दौरान दौसा जिले में अनेक कार्यक्रम होंगे। मेहंदीपुर बालाजी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ेंगे। पपलाज माता मंदिर में भी कार्यक्रम होंगे।
पंडित दिनेश मिश्रा के अनुसार इसी दिन से नए विक्रम संवत का शुभारंभ भी माना जाता है। इस वर्ष ग्रहों के राजा गुरु बृहस्पति होंगे। इस कारण - इस साल धर्म, धर्म, पराक्रम और - सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव अधिक - देखने को मिल सकता है। भारत के अलग-अलग राज्यों में इसे गुड़ी पड़वा, उगादी. चेटीचंड जैसे नामों से भी मनाया जाता है। नवसंवत्सर-2083 के साथ वासंतिक नवरात्र की भी शुरुआत होगी।
ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) रहेगा, जिससे वर्ष में कुल 13 महीने होंगे। करीब तीन वर्ष बाद एक दुर्लभखगोलीय संयोग है, जिसमें ज्येष्ठ मास दो बार आएगा। इस दौरान तप, दान और भगवान विष्णु की पूजा होगी। यह माह विष्णुजी को समर्पित माना जाता है। इस माह में पूजा-पाठ, दान, जप-तप का विशेष महत्व है। अधिक मास के रहने से तीज त्योहार 10 से 15 दिन देरी से आएंगे।
आचार्य ओमप्रकाश शर्मा व जितेन्द्र शास्त्री ने बताया कि हिंदू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित है। चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष करीब 365 दिनों का है। दोनों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर है। इसी अंतर को संतुलित करने के लिए लगभग हर तीन साल में एक अतिरिक्त महीना जोड दिया जाता है। यही अतिरिक्त महीना अधिक मास कहलाता है। इस अतिरिक्त महीने को मलमास, अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है।
इस साल चैत्र नवरात्र 19 मार्च से विशेष योग संयोग में आरंभ होंगे। मां दुर्गा को समर्पित नवरात्र का महापर्व इस बार एक बड़े ही दुर्लभ संयोग में शुरू हो रहा है. नवरात्र के पहले ही दिन मीन राशि में सूर्य, चंद्रमा, शनि और शुक्र का चतुर्ग्रही योग रहेगा. ज्योतिषविदों का कहना है कि यह संयोग शुभ संकेत दे रहा है।इस दौरान की गई खरीददारी और नए कार्य की शुरुआत शुभ फलदाई मानी जाती है।
Updated on:
17 Mar 2026 12:21 pm
Published on:
17 Mar 2026 12:20 pm
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