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Rajasthan: टीचर खुद बैसाखी के सहारे, विभाग ने 150KM दूर कर दिया ट्रांसफर; निर्णय से परिवार भी टेंशन में

Rajasthan Education Department: राजस्थान में 573 शिक्षकों के समायोजन के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण को भी झकझोर दिया है।

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दौसा

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Anil Prajapat

Apr 14, 2026

Third-Grade Teacher Rambhajan Meena

शिक्षक रामभजन मीणा। फोटो: पत्रिका

दौसा। संस्कृत शिक्षा विभाग में अधिशेष शिक्षकों के समायोजन की सूची ने एक बार फिर सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। प्रदेश भर में 573 शिक्षकों के समायोजन के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने न केवल नियमों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण को भी झकझोर दिया है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या समायोजन सूची तैयार करते समय संबंधित संवेदनशील पहलुओं और दिव्यांगता के कॉलम को नजरअंदाज कर दिया गया या फिर यह निर्णय केवल तकनीकी प्रक्रिया तक सीमित रह गया, जिसमें मानवीय पहलू कहीं पीछे छूट गया। मामला नांगल राजावतान के वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय का है, जहां कार्यरत तृतीय श्रेणी शिक्षक रामभजन मीणा 70 प्रतिशत दिव्यांग हैं।

वे चलने-फिरने के लिए बैसाखी पर निर्भर है, लेकिन विभाग ने उन्हें नांगल राजावतान से हटाकर कठूमर (अलवर) भेज दिया है। जबकि दौसा जिले में ही संस्कृत शिक्षा विभाग में कुछ पद रिक्त बताए जा रहे हैं, जहां ऐसे विशेष परिस्थिति वाले शिक्षक को समायोजित किया जा सकता था। इसके बावजूद उन्हें लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थानांतरित कर दिया गया है।

दिव्यांग को नजदीकी स्थान पर रखने का है प्रावधान, लेकिन ऐसा नहीं हुआ

स्थानीय जानकारी के अनुसार दौसा जिले में संस्कृत शिक्षा विभाग में ऐसे कई पद मौजूद हैं, जहां उन्हें आसानी से समायोजित किया जा सकता था। नियमानुसार भी दिव्यांग एवं विशेष परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर नजदीकी स्थान पर रखने का प्रावधान है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।

परिवार भी गहरी चिंता में

रामभजन मीणा शारीरिक रूप से गंभीर रूप से दिव्यांग है। बिना सहारे चलना उनके लिए संभव नहीं है। ऐसे में नए स्थान पर जाकर ड्यूटी ज्वाइन करना, आवागमन और रहने की व्यवस्था करना उनके लिए बेहद कठिन और पीड़ादायक चुनौती बन गया है। इस निर्णय के बाद उनका परिवार भी गहरी चिंता में हैं।

इनका कहना है

सरकार के नियमानुसार ही शिक्षकों का समायोजन किया गया है। यदि किसी दिव्यांग शिक्षक का स्थानांतरण दूर हो गया है तो मामले को दिखवा लेंगे। संबंधित शिक्षक क्षेत्र के विधायक से डिजायर जारी करवाकर पत्र भेज दे। नौकरी में स्थानांतरण एक प्रकिया है।
-गोपाल लाल जाट, संभागीय संस्कृत शिक्षा अधिकारी, जयपुर