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राजस्थान में यहां आजादी के 76 वर्ष बाद भी मोबाइल पर कॉल के लिए पहाड़ पर चढ़ो या दूर जाओ

World Telecommunication Day: संचार क्रांति के इस युग में जहां अब हाई स्पीड डाटा ट्रांसफर के लिए 5-जी का दौर शुरू हो चुका है और लगभग हर कार्य ऑनलाइन होने लगा है, लेकिन लालसोट उपखण्ड क्षेत्र में दो गांव ऐसे भी हैं, जो कि आजादी के 76 वर्ष पूरा होने के बाद भी मोबाइल फोन नेटवर्क से वंचित है।

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दौसा

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Akshita Deora

May 17, 2024

महेशबिहारी शर्मा

संचार क्रांति के इस युग में जहां अब हाई स्पीड डाटा ट्रांसफर के लिए 5-जी का दौर शुरू हो चुका है और लगभग हर कार्य ऑनलाइन होने लगा है, लेकिन लालसोट उपखण्ड क्षेत्र में दो गांव ऐसे भी हैं, जो कि आजादी के 76 वर्ष पूरा होने के बाद भी मोबाइल फोन नेटवर्क से वंचित है। इन गांवों मेें रहने वाले लोगों को यदि किसी इमरजेंसी में मोबाइल पर संपर्क करने की जरुरत पड़ जाए तो 8 किमी दूर जाना पड़ता है या ऊंचे पहाड़ पर चढकर मोबाइल नेटवर्क की तलाश में भटकना पड़ता है।

उपखण्ड के आंतरी क्षेत्र की खटूम्बर ग्राम पंचायत के गांव घाटा व धौण में सरकारी दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल समेत किसी भी निजी कंपनी की ओर से मोबाइल नेटवर्क की सुविधा नहीं है। इसके चलते इन दोनों गांवों में बसे सैकड़ों ग्रामीण संचार क्रांति के इस दौर में भी मोबाइल नेटवर्क तलाशने के लिए प्रतिदिन कई किमी भटक रहे हैं।

घाटा गांव मेें ही पपलाज माता का प्रसिद्ध मंदिर भी मौजूद है और प्रतिदिन यहां देश भर से हजारों श्रद्धालु माता के दर पर पहुंचते हैं, लेकिन श्रद्धालु भी यहां आकर जब अपना मोबाइल देखते है तो नेटवर्क गायब ही मिलता है। पपलाज माता के यहां प्रतिवर्ष दो बार लक्खी मेले का आयोजन होता है और मेले के दौरान पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को बिना मोबाइल नेटवर्क काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। घाटा व धौण गांवों में मोबाइल नेटवर्क के अभाव में सैकड़ों विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षण जैसी सुविधा से वंचित है और साथ ही गरीबों को राशन सामग्री लेने के लिए 5 से 8 किमी दूर तक जाना पड़ रहा है।

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सेटेलाइट से कनेक्ट करने की अनुमति का है इंतजार

जिला दूर संचार अधिकारी राजमल मीना ने बताया कि घाटा, धौण, गोल, अलीपुरा, गोदावास एवं लाहड़ी का बास गांवों में टावर खड़ें किए जा चुके है, इस्टालेंशन का कार्य भी पूरा हो गया है, बिजली कनेक्शन के साथ सौलर प्लांट भी लगाया है। सभी टावर को सेटेलाइट से कनेक्ट करने की अनुमति का इंतजार है। घाटा गांव के टावर के लिए ओएफसी बिछाने के लिए वन विभाग की एनओसी नहीं मिली है। घौण समेत सभी टावर शीघ्र ही शुरू होंगे।

8 माह बाद भी पूरा नहीं हुआ टावर निर्माण कार्य

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गत वर्ष अक्टूबर माह में बीएसएनएल की ओर से क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क से वंचित क्षेत्रों में आमजन को बीएसएनएल का फोरजी नेटवर्क उपलब्ध कराने क्षेत्र में आधा दर्जन गांवों में टावर खड़े किए जाने का कार्य शुरू किया था। उस समय क्षेत्र के लोगों को उम्मीद बंधी थी कि एक-दो माह में ही अब उनके गांव में मोबाइल नेटवर्क की सुविधा मिलने लगेगी, लेकिन करीब 8 माह गुजरने के बाद भी मोबाइल नेटवर्क एक सपना ही बना हुआ है। जानकारी के अनुसार बीएसएनएल द्वारा घाटा, धौण, गोल, अलीपुरा, गोदावास एवं लाहड़ी का बास गांवों में टावर खड़ा किए जा रहे हैं। इन सभी जगहों पर टावर निर्माण कार्य लगभग पूरा भी हो चुका हैै, लेकिन कई सामान की आपूर्ति व अन्य तकनीकी कारणों से ये टावर अब तक शुरू नहीं किए गए हैं।

ऑनलाइन कार्य लालसोट आकर करना पड़ता है

धौण गांव में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय स्थित है और यहां 265 विद्यार्थी अध्ययनरत है, ये सभी विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षण के नवाचार से वंचित है। विद्यालय के प्रधानाचार्य राहुल शर्मा ने बताया कि मोबाइल नेटवर्क केे अभाव ने पंगु बना दिया है, विद्यालय का ऑनलाइन वर्क लालसोट आकर करना पड़ता है, विभाग की सूचना भी समय पर नहीं मिल पाती है,लालसोट आने पर ही पता चलने पर इन सूचनाओं का जवाब दिया जाता है, जिससे कई बार बड़ी परेशानी भी खड़ी हो जाती है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने पहाड़ पर एक दो जगह चिन्हित कर रखी है, जहां कभी-कभार थोड़ा नेटवर्क आता है, ग्रामीणों को इमरजेंसी में पहाड़ पर चढकर बात करनी पड़ती है।