
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 | फोटो सोर्स- patrika.com
Kailash Mansarovar Yatra 2026: शिव भक्तों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। पांच साल के लंबे इंतजार के बाद शुरू हुई पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा का आधिकारिक शेड्यूल 2026 के लिए आ गया है। इस साल यह यात्रा 30 जून से शुरू होकर 26 अगस्त तक चलेगी। विदेश मंत्रालय ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन भी शुरू कर दिए हैं और साथ ही ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तारीख 19 मई 2026 रखी गई है। इस साल की यात्रा कई मायनों में खास है, क्योंकि इसे दो अलग-अलग पारंपरिक मार्गों से संचालित किया जाएगा और सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए गए हैं।
इस साल कैलाश मानसरोवर यात्रा 22 दिनों की होगी, जो दिल्ली से शुरू होकर दिल्ली पर ही खत्म होगी। इस बार पूरी यात्रा का संचालन कुमाऊं मंडल विकास निगम की देखरेख में किया जाएगा। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी शेड्यूल के अनुसार, यात्रा 30 जून से 26 अगस्त 2026 तक आयोजित की जाएगी। यात्रा में शामिल होने के इच्छुक श्रद्धालु 19 मई 2026 तक अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकते हैं।
इस साल सरकार ने यात्रियों के लिए कुल 1,000 सीटों की मंजूरी दी है, जिन्हें 50-50 के छोटे समूहों में बांटा जाएगा। इन यात्रियों को दो अलग-अलग रास्तों से भेजा जाएगा ताकि लोगों को उनकी क्षमता के अनुसार सही विकल्प मिल सकें।
पहला रास्ता लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) का है, जिससे कुल 500 यात्री जाएंगे। यह रास्ता काफी पुराना और चुनौतीपूर्ण है क्योंकि इसमें काफी पैदल चलना और ट्रैकिंग करनी होती है। जो लोग ऊंचे पहाड़ी इलाकों में चलने के आदि हैं, उनके लिए यह रास्ता बहुत अच्छा है। इस साल के रूट में थोड़ा बदलाव किया गया है और यह काठगोदाम-अल्मोड़ा की बजाय टनकपुर और चंपावत से होकर गुजरेगा।
दूसरा रास्ता नाथू ला दर्रा (सिक्किम) का है, जिससे बाकी 500 यात्री जाएंगे। यह रास्ता उत्तराखंड वाले रास्ते की तुलना में काफी आसान है, क्योंकि इसमें ज्यादातर सफर सड़क मार्ग से होता है। अगर आप बुजुर्ग हैं या लंबी पैदल यात्रा करने में थोड़ी परेशानी महसूस करते हैं, तो आपके लिए यह रास्ता बहुत सुविधाजनक रहेगा।
यात्रियों के चयन की प्रक्रिया और नियम
यात्रा के लिए यात्रियों का चयन पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित रैंडम ड्रॉ के जरिए किया जाएगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे महिला और पुरुष आवेदकों के बीच पूरी पारदर्शिता और संतुलन बना रहता है। इसके साथ ही दिल्ली में आयोजित होने वाले मेडिकल टेस्ट में फिट पाए जाने वाले भक्तों को ही आगे की यात्रा पर जाने की अनुमति दी जाएगी। इस बार श्रद्धालुओं को यात्रा के लिए पिछली बार की तुलना में कुछ अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
कैलाश पर्वत को भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है, जिसे हिंदू, बौद्ध, जैन और बोन धर्मों में दुनिया का सबसे पवित्र केंद्र कहा गया है। मानसरोवर झील के पवित्र जल में डुबकी लगाना और कैलाश पर्वत की परिक्रमा करना किसी भी भक्त के लिए एक बहुत ही गहरा और आध्यात्मिक अनुभव होता है।
Published on:
03 May 2026 11:07 am
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