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उत्तराखंड में पर्यटन को लेकर सख्ती, लापरवाही करने पर करोड़ों का जुर्माना ठोक सकता है विभाग

Uttarakhand Tourism विभागीय एक अधिकारी के मुताबिक व्यवसायिक गतिविधियों के नियम एवं विनियम के किसी भी शर्त के उल्लंघन (Uttarakhand Tourism Development Council Act 2019) पर जुर्माना किए जाने का प्रावधान है...

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उत्तराखंड में पर्यटन को लेकर सख्ती, लापरवाही करने पर करोड़ों का जुर्माना ठोक सकता है विभाग

उत्तराखंड में पर्यटन को लेकर सख्ती, लापरवाही करने पर करोड़ों का जुर्माना ठोक सकता है विभाग

(देहरादून,अमर श्रीकांत): पर्यटन विभाग ने अपनी नियमावली को पहले के मुकाबले और ज्यादा सशक्त करने का फैसला लिया है। इस क्रम में पर्यटन विकास परिषद को ज्यादा अधिकार दिया गया है ताकि वह ढुलमुल गति से काम करने वाली एजेंसियों और इकाइयों पर जुर्माना ठोक सके। इसके लिए सरकार ने आनन—फानन में उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद अधिनियम, 2001 में संशोधन (2019) किया है। अब पर्यटन विकास परिषद बेधडक़ होकर पर्यटन व्यवसाय में जुड़ी कंपनियों पर जुुर्माना ठोक सकता है। राज्यपाल ने इस अध्यादेश को मंजूरी भी दे दी है।


दरअसल पर्यटन विकास परिषद को अब तक पेनल्टी का अधिकार नहीं होने से पर्यटन विकास के क्षेत्र में काफी परेशानी उठानी पड़ती है। साथ ही आर्थिक नुकसान भी पर्यटन विभाग को झेलना पड़ता है। उद्योग समिट -2018 में काफी संख्या में पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को लेकर अनुबंध हुए हैं। खासकर अनुबंधों में पर्वतीय जनपदों में पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग और होटल व्यवसाय से जुड़े काम उत्तराखंड में शुरू किए जा चुके हैं। कंपनियों के बारे में पर्यटन विभाग के पूर्व का अनुभव भी काफी खराब रहा है। कभी भी पर्यटन से जुड़े काम चाहे केंद्र पोषित हो या फिर राज्य पोषित योजनाएं हों, समय पर कंपनियों द्धारा पूरे नहीं किए जाने से पर्यटन विभाग को अब तक करोड़ों की चपट लग चुकी है। कंपनियों द्धारा निर्धारित समय पर काम पूरा नहीं होने की वजह से निर्माण कार्यों की लागत बढ़ जाती है। कंपनियों पर अंकुश नहीं होने से कंपनियां मनमानी काम करती हैं।

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इसलिए उत्तराखंड सरकार ने इसे अतिआवश्यक मानते हुए सीधा उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद अधिनियम, 2001 में संशोधन के लिए एक माह पहले राजभवन भेजा और राज्यपाल ने इसकी महत्ता को समझते हुए तुरंत अपनी स्वीकृति भी चंद रोज पहले प्रदान कर दी है। पूर्व अधिनियम के तहत पर्यटन विकास परिषद को केवल लाइसेंस ही रद्द करने का अधिकार था। लेकिन अब नए संशोधन (2019) अधिनियम के तहत लाइसेंस रद्द के अलावा जुर्माना करने की भी व्यवस्था है। नुकसान के हिसाब से पर्यटन विकास परिषद जुर्माना ठोकने के लिए स्वतंत्र है। इस अधिनियम के लागू हो जाने से उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद का प्रभावी नियंत्रण निर्माणदायी कंपनियों पर होगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिल गई है। अब जल्द ही पर्यटन विकास परिषद नए अधिनियम को लेकर एक कमेटी का गठन करेगा। इस कमेटी में दंडाधिकारी सहित अन्य पदों को तुरंत भरने के आदेश भी जारी किए गए हैं।

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एक करोड़ तक का हो सकता है जुर्माना...

विभागीय एक अधिकारी के मुताबिक व्यवसायिक गतिविधियों के नियम एवं विनियम के किसी भी शर्त के उल्लंघन पर जुर्माना किए जाने का प्राविधान है। 50 लाख से एक करोड़ या फिर इससे ज्यादा पेनाल्टी पर्यटन विकास परिषद कर सकता है। विभागीय अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इससे पर्यटन विभाग को लाभ पहुंचेगा। साथ ही कंपनियों के मन में भय रहेगा। कंपनियां निर्धारित समय पर काम को पूरा करेंगी। अधिकारी ने बताया कि बीते विधानसभा के पटल पर उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद अधिनियम ,2001 में संशोधन करने की बात थी लेकिन विधानसभा का सत्र लंबा नहीं चलने की वजह से इसे सदन में पेश नहीं किया जा सका है। नियमत: आवश्यक कानून की स्वीकृति राज्पाल से ले जा सकती है। लेकिन फिर इसे सदन में 6 माह के अंदर पेश करना होगा। यदि इस बीच विधानसभा सत्र शुरू होने में देर होगी तो ऐसी स्थिति में फिर 6 महीने की अवधि बढ़ाई जा सकती है।


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