
कैप्टन शहीद अंशुमान सिंह को मरणोपरांत मिलेगा कीर्ति चक्र , तीसरा बड़ा सैन्य सम्मान
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देवरिया के रहने वाले और सेना के मेडिकल कोर में कैप्टन शहीद अंशुमान सिंह को कीर्ति चक्र मरणोपरांत देने की घोषणा की गई है। सियाचिन ग्लेशियर में अपने साथियों को बचाने और अदम्य साहस का प्रदर्शन करते हुए कैप्टन अंशुमान शहीद हो गए थे।
AFMC कालेज से थे MBBS
लार विकास खंड के बरडीहा दलपत गांव निवासी रवि प्रताप सिंह के पुत्र अंशुमान सिंह ने AFMC (आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज) पुणे में चयन के बाद वहां से MBBS की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद अंशुमान का चयन सेना के मेडिकल कोर में हो गया। आगरा मिलिट्री हॉस्पिटल में ट्रेनिंग के बाद डा. अंशुमान सिंह की तैनाती आगरा में ही हो गई।
गोला बारूद के डिपो में आग लगने के बाद भी साथियों को बचाते रहे
5 जुलाई को उनकी तैनाती सियाचिन ग्लेशियर में हुई थी। जहां गोला बारूद के भंडार में शॉर्ट सर्किट से आग लग जाने के कारण उन्होंने अपनी जान की परवाह नहीं करते हुए साथियों को सही सलामत निकालने में लगे रहे। कई प्रयासों में उन्होंने कई सैनिकों को बंकर से बाहर निकाला। बाहर निकालने के क्रम में ही आग के गोले के चपेट में आकर शहीद हो गए।
कैप्टन अंशुमान की शादी शहादत से 5 महीने 10 दिन पूर्व पठानकोट की रहने वाली और मल्टीनेशनल कंपनी में इंजीनियर स्मृति सिंह से हुई थी। स्मृति के माता-पिता स्कूल में प्रधानाचार्य हैं। जबकि शहीद अंशुमान के पिता रवि प्रताप सिंह सेना से सेवानिवृत्त जेसीओ हैं। शहीद के भाई घनश्याम सिंह और बहन तान्या सिंह नोएडा में डॉक्टर हैं।
बेटे को भले खोया पर शहादत पर नाज
सेना से सेवानिवृति जेसीओ और शहीद अंशुमान के पिता रवि प्रताप सिंह ने कहा कि बेटे की शहादत पर नाज है। फौजी हूं, युद्ध क्षेत्र की कठिनाइयों को समझ सकता हूं। बेटे को भले खोया है, लेकिन शहादत का गर्व है। यह कहते हुए बुजुर्ग पिता के आँखों से आंसू निकल आए।
कीर्ति चक्र तीसरा बड़ा सैन्य सम्मान
कीर्ति चक्र एक भारतीय सैन्य सम्मान है। जो युद्ध के मैदान से दूर वीरता, साहसी कार्रवाई या आत्म बलिदान के लिए दिया जाता है।
Published on:
25 Jan 2024 09:50 pm
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