
देवास की छठी महापौर चुनी गई गीता
देवास। मध्यप्रदेश में बुधवार को नगर निकायों के दूसरे चरण की काउंटिंग में सभी 5 नगर निगमों की तस्वीर अब साफ हो चुकी है। कांग्रेस ने बीजेपी से मुरैना और रीवा सीट छीन ली। बीजेपी के खाते में रतलाम और देवास की सीट ही आई है। कटनी में तो बड़ा उलटफेर हो गया है। यह सीट बीजेपी की बागी निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती है। पिछले चुनावों में इन पांचों नगर निगमों में बीजेपी के ही मेयर थे। हालांकि पांचों निगमों में बीजेपी का ही बोर्ड बनना तय है पर यह भी साफ हो गया है कि बीजेपी केवल मालवा का गढ़ बचाने में ही कामयाब रही, विंध्य और चंबल में अपनी सीटें नहीं बचा सकी।
देवास में तो नगरवासी बीजेपी पर इतने मेहरबान हुए कि राजनैतिक हल्कों में अभी तक बिल्कुल अनजान रहीं गीता अग्रवाल को प्रथम नागरिक चुन लिया। चुनाव के पहले तक घरेलू महिला रहीं गीता अग्रवाल ने अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस की विनोदिनी व्यास को 45884 वोटों से हरा दिया. वे देवास की छठी महापौर चुनी गई हैं। गीता अग्रवाल को चुनाव में कुल 89502 वोट मिले जबकि कांग्रेस की उम्मीदवार विनोदिनी व्यास को कुल 43618 वोट मिले। इस तरह एक सीधी—सादी गृहणी अब शहर की मेयर बन गईं हैं। जीत के बाद उन्होंने मतदाताओं का आभार जताया. गीता अग्रवाल ने कहा— घर के साथ शहर की सरकार भी चलाउंगी. विकास और जनसुविधाओं पर जोर दूंगी.
देवास के महापौर पद पर कब्जा जमानेवाली गीता अग्रवाल को राजनीति का व्यवहारिक अनुभव जरा भी नहीं हैं। वे अग्रवाल समाज और अन्य समाजों के धार्मिक तथा सामाजिक कामों में शामिल होती रहीं हैं. सौम्यता और मिलनसारिता उनका विशेष गुण है और यही कारण है कि महिलाओं में उनकी खासी लोकप्रियता है। हालांकि राजनीति उनकी लिए बिल्कुल नई भी नहीं है। उनके पति दुर्गेश अग्रवाल शहर और जिले की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। दुर्गेश अग्रवाल देवास विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रहे हैं. वे विधायक गायत्री राजे पवार के विधायक प्रतिनिधि भी रहे हैं। महापौर के चुनाव में देवास राजघराने की विधायक गायत्री राजे पवार और उनके पुत्र विक्रमसिंह पवार गीता अग्रवाल के लिए घर—घर वोट मांगने गए. कहा जा रहा है इसका उनको चुनाव में खासा फायदा भी मिला और वे बड़े अंतर से विजयी रहीं।
Published on:
20 Jul 2022 04:17 pm
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