
Editor in Chief Patrika Gulab Kothari: दिशा बोध को संबोधित करते कोठारी और मंचासीन गणाचार्यश्री पुष्पदंत सागर।
Editor in Chief of Patrika Gulab Kothari: मन में बहुत ताकत है इसे काम में लो। माता-पिता शरीर दे सकते हैं पर आत्मा नहीं। गुरु आत्मा का पोषक है। वे धर्म, काम और मोक्ष का संचालन करते हैं, वह सिखाते हैं, ताकि हम उस मार्ग पर चलते रहें। गुरु, माता-पिता से कई गुना बड़े होते हैं। उनका कार्यक्षेत्र आत्मा है। पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने शनिवार को पुष्पगिरि तीर्थ सोनकच्छ में आयोजित दिशा बोध कार्यक्रम में यह बात कही। शिक्षा, परंपरा, जीवनशैली पर छात्र- छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, हमें किसी को देने लायक बनना है, हमें जीवन में किसी से कुछ लेना नहीं है। किसी से कुछ मांगना नहीं है, अपने पांव पर खड़ा होना है। कोठारी ने गणाचार्यश्री पुष्पदंत सागर से चर्चा की और पुस्तक स्त्री देह से आगे की प्रति भेंट की।
अच्छी भाषा का महत्त्व कोठारी ने सरस्वती का प्रभाव उदाहरण से बताया। पानी की दो सील बोतल अलग-अलग कमरे में रखें। एक कमरे में रोज 5 मिनट प्रार्थना करें, माला जपें। दूसरे कमरे में बोतल के सामने दूसरी भाषा का उपयोग कर सकते हैं। जिस बोतल के सामने मंत्र जाप किया, वह तीन महीने में केसरिया होने लगेगा, खुशबू आने लगेगी। उस पानी को हाथ नहीं लगाया बस मंत्र की ध्वनि गुजरी। दूसरी बोतल के पानी में हल्का कालापन होगा, दुर्गंध आने लगेगी। इससे समझेंगे कि अच्छी भाषा से जल में भी सुगंध आ जाती है।
इस अवसर पर गणाचार्यश्री पुष्पदंत सागर ने कहा, ज्ञान का अमृत पीना चाहते हैं तो मन में एक बात धारण अवश्य कर लें। आपका औचित्य है कि हम बड़े पद पर पहुंच जाएं। मैं सोचता हूं कि हमें पद नहीं चाहिए, जिस दिन हृदय की सरस्वती जाग जाएगी तो सारा संसार हमारे पास आ जाएगा।
हमने पढ़ा तीर्थंकरों के शरीर से खुशबू आती है। खुशबू आपके शरीर से भी आ सकती है। ध्वनि को नहीं रोक सकते पर अच्छी संगत में जितना रहेंगे उतनी शुद्ध ध्वनि शरीर से गुजरेगी। रक्त को पावन करेगी। आत्मा को निर्मल करती निकलेगी।
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Published on:
16 Feb 2025 09:22 am
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