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देवास. जनसाहस संस्था व पुलिस विभाग देवास द्वारा मानव तस्करी के विरूध्द अंतर्राष्ट्रीय दिवस के उपलक्ष्य में सोमवार को कार्यक्रम निजी होटल आयोजित किया। मुख्य उद्देश्य भारत में बढ़ती मानव तस्करी की रोकथाम के लिए साझी जिम्मेदारी पर विचार करना, पीडि़त व्यक्ति, उनके परिवार एवं समुदाय के सशक्तिकरण के लिए पहल करना था। साथ ही मानव तस्करी (रोकथाम, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक 2017 पर चर्चा करना था।
मुख्य अतिथि के रूप में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एडीजे समरोज खान, किशोर न्याय बोर्ड से प्रधान न्यायाधीश पदमजा राजोरे तिवारी, एसपी अंशुमानसिंह, जिला बाल कल्याण समिति अध्यक्ष रितू व्यास, महिला एवं बाल विकास विभाग से सुनीता यादव, जिला महिला सशक्तिकरण अधिकारी आकांक्षा बछोटे व अभिभाषक पहल मंच के संयोजक मोहन पांचाल एडवोकेट उपस्थित थे। जन साहस से सामाजिक कार्यकर्ता क्रांति खोड़े एवं मोनालिका तिवारी के द्वारा जानकारी दी। एडीजे खान ने बताया, आज भी मानव तस्करी की समस्या गंभीर रूप से बनी हुई है। इस समस्या की रोकथाम के लिए सभी शासकीय और गैरशासकीय सामाजिक संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ सम्मिलित प्रयास करने की नितांत आवश्यकता है। एसपी सिंह ने बताया, समाज को अपराध मुक्त बनाने में अपनी भूमिका निभाते हुए आगे आएं, तभी हम एक अपराध मुक्त समाज की कल्पना कर सकते हैं। साथ हि उन्होंने प्रतिभागी के रूप उपस्थित नवआरक्षकों को संदेश दिया कि वे अपनी भूमिका को समझे एवं उनका पालन करें।
राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के अनुसार सन 2016 में भारत में मानव तस्करी के 8132 मामले रिकॉर्ड किए गए, जिनमें 15379 लोग इसके शिकार हुए। इनमें 58 प्रतिशत पीडि़त 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे थे। इनमें 7670 मामले लैंगिक उत्पीडऩ के थे। मप्र मानव तस्करी के दर्ज किए मामलों में सन 2016 में देशभर में 16वें स्थान पर था। प्रदेश में सन 2016 में पुलिस द्वारा 18 वर्ष से कम उम्र के 975 बालक एवं 1678 बालिकाओं को मानव तस्करी से मुक्त करवाया गया। साथ ही साथ 18 वर्ष से अधिक उम्र के 620 पुरूष एवं 1544 महिलाओं को मानव तस्करी से मुक्त करवाया गया है।
Published on:
31 Jul 2018 12:46 pm
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