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नाजायज औलाद के तानों से तंग आकर कविता ने की थी खुदकुशी

- पति, सास व ससुर को 10-10 साल की कठोर सजा - शादी के 10 माह बाद ही मायके में कर ली थी आत्महत्या- साढ़े छह साल बाद मिला न्याय, 25-25 हजार अर्थदंड

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Kamal Singh

Jul 09, 2016

Dewas Photo

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देवास. पति सुनील की कुंडली में बिटिया के पैदा होने का योग नहीं लिखा है, इसलिए बहू कविता को हुई बेटी सुनील की न होकर, नाजायज औलाद है। इस ताने ने कविता को बुरी तरह से अवसाद में धकेल दिया था। जब उसके सामने कोई रास्ता नहीं बचा, तो उसने बेटी के साथ खुदकुशी करने का फैसला ले लिया। विवाह होने के नौवें महीने में डिलेवरी होने से कविता के ससुराल वालों को अवैध संबंधों के तानों से तंग आकर अक्टूबर 2009 में 18 दिन की बेटी के साथ कुएं में कूद गई थी।
कविता के पिता गजेंद्र सिंह चंदेल की लड़ाई को आखिरकार सफलता मिली। साढ़े छह साल बाद उन्हें न्याय मिला। कविता की हत्या का दोषी पति सहित सास व ससुर को मानते हुए कोर्ट ने शुक्रवार को तीनों को 10-10 साल की कठोर कारावास सजा सुनाई है। साथ ही 25-25 हजार का अर्थदंड ठोंका गया। पिता गजेंद्र सिंह ने कोर्ट के फैसले को संतोषजनक बताया है। उन्होंने कहा कि देर ही सही पर हत्यारों को कानून ने सजा मिली मिली। फैसला आने के बाद तीनों आरोपियों के चेहरे बुझ गए।
बरोठा थाना क्षेत्र के गांव बड़ी चुरलाय निवासी कविता पिता गजेन्द्र सिंह की शादी 29 नवंबर 2008 को मंडलावदा निवासी सुनील सिंह से हुई थी। सुनील का परिवार देवास के मिश्रिलाल नगर में रहने लगा था। 25 सितंबर 2009 को कविता ने अपने मायके बड़ी चुरलाय में पुत्री को जन्म दिया। इसके 18 दिन बाद ही 11 अक्टूबर की रात कविता अपनी बेटी के साथ लापता हो गई। 12 अक्टूबर की शाम को दोनों के शव रामप्रसाद सेठ के कुएं से मिले। पिता गजेंद्र की सूचना पर बरोठा पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। पुलिस की जांच में पता चला कि पति सुनील, सास शारदाबाई और ससुर मनोहर सिंह कविता के चरित्र पर शंका करते थे, कहते थे कि 9 माह में ही डिलेवरी कैसे हो गई और सुनील की कुंडली में पुत्री योग ही नहीं है। जांच पूरी होने के बाद तीनों के खिलाफ आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का केस दर्ज किया गया था। उपसंचालक अभियोजन अजय सिंह भंवर ने बताया कि सुनवाई के बाद तीनों आरोपितों को प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश पीसी शर्मा ने 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। 25-25 हजार रुपए का अर्थदंड भी किया गया। पैरवी विशेष लोक अभियोजक अशोक कुमार चावला ने की। अर्थदंड की राशि में से 60 हजार रुपए कविता के माता-पिता को दिए जाएंगे। यदि आरोपित अर्थदंड जमा नहीं करते तो उन्हें 2-2 साल का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।