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तैरना नहीं जानता था 10 साल का श्रीकांत, दोस्त को डूबता देख लगा दी छलांग, ऐसे बचाई जान

महज 10 साल के श्रीकांत ने बहादुरी की ऐसी मिसाल पेश की है जो आज के दौर के बच्चों के लिए एक नजीर है। जी हां बहादुर बच्चे ने डूबते हुए दोस्त की जान बचाई।
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धमतरी

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Ashish Gupta

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Updated: 27 Dec 2017, 2:41 PM IST

Brave Boy

तैरना नहीं जानता था 10 साल का श्रीकांत, दोस्त को डूबता देख लगा दी छलांग, एेसे बचाई जान

धमतरी. छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में इन दिनों लोग 10 साल के श्रीकांत की बहादुरी की मिसालें देते हुए नहीं थक रहे हैं। यहां 9 साल के अपने दोस्त को डूबते हुए देख एक 10 साल के बच्चे ने उसे अपनी जान पर खेलते हुए नहर से बाहर निकाला। श्रीकांत को तैरना नहीं आता फिर भी 9 साल के एक बच्चे को डूबते हुए देखकर तालाब में छलांग लगा दी और बच्चे की जान बचा ली।

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दरअसल, यह मामला नगरी वनांचल के ग्राम भुरसीडोंगरी का है। जानकारी के अनुसार सोमवार की शाम गांव का 9 वर्षीय आशीष कुमार नेताम पिता राधे नेताम अपने साथियों के साथ खेल रहा था। खेल-खेल में उसने एक मूर्ति की प्रतिमा बनाई।

सब बच्चे पूजा-अर्चना कर प्रतिमा विसर्जन के लिए तालाब पहुंच गए। मूर्ति को लेकर आशीष नेताम तालाब में उतर गया। बताया जाता है कि उसे तैरना नहीं आता था। अचानक वह गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा।

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आशीष के बचाओ-बचाओ की आवाज सुनकर सभी बच्चे घबराकर भाग निकले। इसी दौरान वहां से साइकिल से गुजर रहे उसके १० साल के दोस्त श्रीकांत गंजीर पिता ब्रिटेश गंजीर की नजर डूबते हुए आशीष पर पड़ी। आशीष की जान बचाने श्रीकांत ने तालाब में छलांग लगा दी।

श्रीकांत को भी तैरना नही आता था, बावजूद किसी तरह आशीष को खींचते हुए किनारे तक ले आया, जिससे उसकी जान बच गई। पानी पीने की वजह से श्रीकांत बेहोश हो गया। सूचना पर घटनास्थल पहुंचे ग्रामीणों ने श्रीकांत को अस्पताल पहुंचाया।

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वीरता पुरस्कार का आश्वासन
इस घटना की खबर गांव से निकलकर महिला एवं बाल विकास विभाग तक पहुंची तो जिला अधिकारी रेणु प्रकाश ने साहसी बालक श्रीकांत गंजीर की सराहना करते हुए उसे राज्य सरकार से वीरता पुरस्कार दिलाने का आश्वासन दिया।