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Bank Fraud News: पासबुक में हाथ से एंट्री कर गाढ़ी कमाई हड़पने का आरोप, धमतरी के 10 खाताधारकों के 68 लाख से ज्यादा फसे

Dhamtari Bank Scam: पासबुक में हाथ से एंट्री कर ग्रामीणों से जमा कराई गई लाखों रुपये की राशि बैंक खातों में जमा ही नहीं की गई।
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धमतरी

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Love Sonkar

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Updated: 27 Jun 2026, 12:56 PM IST

Bank Fraud News

भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र (Photo File Image)

Chhattisgarh Bank News: धमतरी जिले के भखारा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कोर्रा स्थित भारतीय स्टेट बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र (सीएचसी) में बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। सीएससी संचालक पर आरोप है कि उन्होंने वर्षों तक ग्रामीणों से नकद राशि जमा कराई, लेकिन उसे बैंक के खातों में जमा नहीं किया। शिकायत के अनुसार पासबुक में कंप्यूटर एंट्री के बजाय हाथ से रकम लिखकर सील लगा दी जाती थी, जिससे खाताधारकों को लंबे समय तक धोखाधड़ी का पता नहीं चल सका। मामले का खुलासा तब हुआ, जब कई ग्रामीण अपनी जमा राशि निकालने के लिए एसबीआई की मुख्य शाखा भखारा पहुंचे।

भुगतान के नाम पर दिए बाउंस चेक

बैंक रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि पासबुक में दर्ज लाखों रुपये खातों में मौजूद ही नहीं हैं। इसके बाद पीडि़तों ने बैंक प्रबंधन से शिकायत की। बैंक प्रबंधक को सौंपे गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2013 से 2025 के बीच ग्रामीणों से नियमित रूप से नकद जमा ली जाती रही, लेकिन राशि बैंक के सर्वर में दर्ज नहीं की गई। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब उन्होंने पैसे वापस मांगे तो आरोपी ने भुगतान के नाम पर एचडीएफसी बैंक, इंडसइंड बैंक और जिला सहकारी बैंक के चेक दिए, जो बाद में बाउंस हो गए।

10 खाताधारकों के 68.35 लाख फसे

शिकायत में शामिल 10 खाताधारकों की कुल कथित फसी राशि 68.35 लाख से अधिक बताई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पूरे क्षेत्र के खातों की जांच कराई जाए तो घोटाले की राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है। घटना के बाद बैंक की निगरानी और ऑडिट व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि पासबुक में वर्षों तक हाथ से एंट्री की जाती रही तो मुख्य शाखा और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को सामूहिक आवेदन देकर अपनी जमा राशि वापस दिलाने और दोषी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

बैंक की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल

इस मामले के सामने आने के बाद बैंक की निगरानी और ऑडिट व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वर्षों तक पासबुक में हाथ से एंट्री की जाती रही, तो मुख्य शाखा और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। उनका आरोप है कि समय पर निगरानी होती तो इतने बड़े वित्तीय नुकसान से बचा जा सकता था।

प्रशासन से कार्रवाई की मांग

पीड़ित ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और बैंक प्रबंधन को सामूहिक आवेदन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने, फंसी हुई जमा राशि वापस दिलाने और दोषी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जीवनभर की गाढ़ी कमाई इस कथित फर्जीवाड़े में फंस गई है और उन्हें न्याय मिलने तक वे अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।