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नाबालिग से प्यार के बाद उतारा मौत के घाट, फिर युवक के परिजनों ने शव के साथ किया ये सब

यामिनी की हत्या में प्रेमी साहिल उर्फ साहेब दास विश्वकर्मा (22) पिता पुनीत राम चंगोराभाठा रायपुर का नाम सामने आया है।

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CG news

धमतरी. 11 महीने पहले संबलपुर नहर में मिली नाबालिग युवती की हत्या कोई और नही, बल्कि उसके प्रेमी साहिल विश्वकर्मा ने ही की थी। आरोपी ने प्रेम-प्रसंग में विवाद के बाद उसने अपनी प्रेमिका का गला दबाकर मौत के घाट उतार दिया। इसके बाद युवक अपने परिजनों के साथ मिलकर लाश को चोरी-छिपे नहर में फेंक दिया।

यह है पूरा मामला

अर्जुनी पुलिस ने मंगलवार को एक और हत्याकांड का खुलासा करते हुए बताया कि बीते साल 12 मार्च को संबलपुर नहर नाली में एक 17 वर्षीय अज्ञात युवती की लाश मिली थी। बाद में उसकी पहचान रायपुर लाखे नगर निवासी विमल सोनी की पुत्री यामिनी सोनी के रूप में हुई।

इस मामले में रायपुर सिटी कोतवाली में गुम इंसानी कायम है। मृतका के परिजनों के सामने आने के बाद अर्जुनी पुलिस और साइबर क्राइम ने मामले की पड़ताल शुरू की, तो मृतका के संबंध में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले, जिसकी जांच कर पुलिस ने इस हत्या के रहस्य पर से पर्दा उठा दिया। गौरतलब है कि यामिनी की हत्या में प्रेमी साहिल उर्फ साहेब दास विश्वकर्मा (22) पिता पुनीत राम चंगोराभाठा रायपुर का नाम सामने आया है।

पुलिस ने बताया कि पूछताछ में पहले आरोपी ने काफी गुमराह किया, फिर बाद में वह टूट गया और अपना अपराध कबूल कर लिया। आरोपी साहिल ने बताया कि घटना दिनांक 7 मार्च को यामिनी के साथ वाद-विवाद होने पर गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद अपने बड़े भाई दिनेश विश्वकर्मा (33), भाभी कुसुम विश्वकर्मा (30) एवं दोस्त नानू उर्फ नारायण बेहरा (21) निवासी पुरानी बस्ती रायपुर के साथ लाश को आटो में डालकर धमतरी आ गया और संबलपुर नहर में डालकर वापस चला गया। पांच दिनों बाद लाश यहां पानी से बाहर आई थी।

आरोपी ने पुलिस को किया गुमराह
आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने के लिए फूल प्लानिंग की थी। लाश नहर में फेंकने के दूसरे 8 मार्च को भी तकनीकी रूप से मृतका के जिंदा होने का सबूत बनाया था, ताकि पुलिस और परिजनों को गुमराह किया जा सके। बार-बार अपना बयान भी बदलता रहा।

ऐसे हुआ खुलासा
पुलिस ने बताया कि यही नहीं कोमाखान निवासी एक अन्य व्यक्ति भनत साहू ने भी मृतका को अपनी पुत्री के रूप में पहचान की थी, जिसके बाद पुलिस ने उसे शव को सुपुर्द कर दिया था। बाद में उसकी पुत्री कमलेश्वरी साहू गुजरात के बड़ोदरा में जीवित मिली, जिसके बाद फिर से यामिनी की फाइल खुली और इस तरह इस हत्याकांड का खुलासा हुआ।