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समर्थन मूल्य में धान बेचने के लिए 30 फीसदी किसानों को नहीं मिला टोकन, काट रहे चक्कर

समर्थन मूल्य में हो रही धान खरीदी में टोकन सिस्टम अनिवार्य किए जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है।

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धमतरी

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Deepak Sahu

Nov 29, 2018

cg farmers

समर्थन मूल्य में धान बेचने के लिए 30 फीसदी किसानों को नहीं मिला टोकन, काट रहे चक्कर

धमतरी. छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य में हो रही धान खरीदी में टोकन सिस्टम अनिवार्य किए जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। पंजीकृत 94 हजार किसानों में से अब तक 30 प्रतिशत किसानों को टोकन नहीं मिल पाया है। जिसके कारण वे समर्थन मूल्य में धान नहीं बेच पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि खरीदी केन्द्रों में भीड़ नहीं है। इसके बाद भी टोकन के लिए उन्हें घुमाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के 84 केन्द्रों में एक नवंबर से समर्थन मूल्य में धान की खरीदी हो रही है। अब तक 22 हजार 336 किसान अपना धान बेच चुके हैं, जिसकी कीमत 174 करोड़ रुपए है। लिकिंग के माध्यम से किसानों से कर्ज की वसूली भी की जा रही है। इसके तहत अब तक 32 करोड़ 7 लाख रुपए की वसूली हो चुकी है। समर्थन मूल्य में धान बेचने के लिए टोकन लेना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके बगैर धान नहीं लिया जा रहा है। जब धान खरीदी शुरू हुई थी, उस दौरान कई किसानों का धान कटाई के लिए पककर तैयारी नहीं हुआ था, इसलिए वे टोकन नहीं कटा पाए थे। अब जब वे टोकन कटाने के लिए जा रहे हैं, तो उन्हें 15 से 20 दिन बाद आने के लिए कहकर उन्हें लौटाया जा रहा है। समय पर धान की बिक्री नहीं होने से जरूरतमंद किसानों की परेशानी बढ़ गई है।

खरीदी केन्द्र लोहरसी के अंतर्गत परसतराई, लोहरसी और खुरतली के किसान आते हैं। यहां पंजीकृत 949 किसान में से करीब 5 सौ का टोकन कटा है। नवागांव के किसान राजेश कुमार, मनोज कुमार साहू ने बताया कि उनके पास टोकन नहीं होने से वे अपने धान को खलिहान में रख दिया हैं।

सहकारी केन्द्रीय बैंक के जिला अधिकारी आरपी शर्मा ने बताया कि केन्द्रों में टोकन सिस्टम से धान की खरीदी हो रही है। किसानों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है।

बता दे कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस समेत अन्य राजनैतिक पार्टियों ने सत्ता में आने के बाद किसानों का कर्ज माफ करने का वादा किया है, इसलिए टोकन कटाने के बाद भी कई किसान धान बेचने नहीं आ रहे हैं। केन्द्रों में भीड़ कम है। 28 दिनों में अब तक सिर्फ 25 प्रतिशत किसान ही धान बेच पाए हैं। इसके बाद भी टोकन नहीं काटे जाने से किसानों में नाराजगी है।