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Hanuman Jayanti 2026: धमतरी के 3 प्रमुख हनुमान मंदिर, जहां पूरी होती है हर मनोकामना, साथ पूजे जाते हैं हनुमान-गणेश

Hanuman Jayanti 2026: धमतरी के तीन ऐसे प्राचीन हनुमान मंदिर हैं, जिन्हें श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने और हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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धमतरी

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Khyati Parihar

•

Updated: 2 Apr 2026, 6:37 PM IST

स्वयंभू, दक्षिणमुखी सहित मनोकामना पूरी करने वाले हनुमान (फोटो सोर्स- photo- पत्रिका)

स्वयंभू, दक्षिणमुखी सहित मनोकामना पूरी करने वाले हनुमान (फोटो सोर्स- photo- पत्रिका)

Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जन्मोत्सव का पर्व इस साल हस्ता नक्षत्र और ध्रुव योग के शुभ संयोग में गुरूवार को मनाया जाएगा। इसके लिए शहर के सभी हनुमान मंदिरों में तैयारी पूरी कर ली गई है। सुबह चोला चढ़ाने के बाद हवन-पूजन और महाआरती होगी। धमतरी शहर में तीन ऐसे प्राचीन हनुमान मंदिर है, जो लोगों के आस्था के प्रमुख केन्द्र हैं। मान्यता है कि इन मंदिरों में पूजा-अर्चना पश्चात हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और मनोकामना पूरी होती है।

स्वयंभू है किले का हनुमान मंदिर

किले के श्री हनुमान मंदिर ट्रस्ट के सचिव विपिन पवार ने बताया कि यहां स्वयंभू हनुमान जी विराजमान है। अतिप्राचीन मंदिर होने से इसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली है। संभवत: छत्तीसगढ़ का यह पहला मंदिर हैं, जहां हनुमान जी के साथ भगवान गणेश विराजित है। पहले टीलानुमा झोपड़ी थी। 1950 में बाबू पंढरीराव कृदत्त ने गायत्री संस्कृत पाठशाला के निर्माण के लिए करीब 55 एकड़ जमीन मंदिर समिति को दी।

इस मंदिर के प्रथम पुजारी पं दीनानाथ महाराज थे। उनके बाद हनुमान प्रसाद ब्रह्मचारी ने अपनी सेवाएं दी। उन्होंने 24 लाख गायत्री मंत्र का पुनश्चरण कर यहां माता गायत्री की प्रतिमा स्थापित कराई। इसके बाद से यहां गायत्री संस्कृत पाठशाला का संचालन हो रहा है। मंदिर में श्रीराम दरबार, मां दुर्गा और कालभैरव की प्रतिमा भी स्थापित है। प्राचीन मंदिर होने के चलते यह जर्जर अवस्था में आ गया था। वर्तमान में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है।

वर्ष-1965 में श्री हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई

पुराना बस स्टैंड स्थित दक्षिणमुखी हनुमान मंदिर के पुजारी पंडित खेमराज तिवारी ने बताया वर्ष-1965 में श्री हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की गई। दक्षिणमुखी होने के कारण इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली है। मान्यता है कि इस मंदिर में मांगी गई मनोकामना हनुमान जी पूरी करते हैं।

इस मंदिर में हनुमान की पूजा से अनिष्ठ ग्रहों से मिलती है शांति

श्रीराम जानकी मठ मंदिर भी अपने आप में इतिहास को समेटे हुआ है। मंदिर के पुजारी महंत हनुवंशदास वैष्णव बताते हैं कि मंदिर की सेवा करते यह उनकी ९वीं पीढ़ी है। यहां हनुमानजी स्वयंभू है। दक्षिणमुखी होने के साथ ही हनुमान जी की यह एक ऐसी प्रतिमा है, जो अपने आप में अद़्भूत है। हनुमानजी के अपने बांए पैर में शनिदेव और दाएं पैर में मकरध्वज को दबाए हुए हैं। दोंनो भुजाओं में सर्पों का बाजू बंध हैं। जनेऊ के रूप में सर्प धारण किए हुए हैं। रामानंदी तिलक के साथ यहां हनुमानजी प्रत्यक्ष रूप से विराजमान हैं।

श्री वैष्णव ने बताया कि यह मंदिर कितना पुराना है इसे बता पाना तो मुश्किल हैं। मान्यता है कि ऐसे हनुमान जी की मंगलवार और शनिवार को पूजा-अर्चना कर नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी प्रकार के मनोरथ सिद्ध होते हैं।

जगराता कार्यक्रम का होगा आयोजन

मकेश्वर वार्ड धमतरी में श्री मारूति नंदन हनुमान परिवार एवं एमजी ग्रुप द्वारा हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर सुबह 8 बजे चोला अभिषेक और पूजन कार्यक्रम हुआ। पश्चात शाम 4 बजे भोग भंडारा और प्रसादी वितरण किया गया। गोपी यादव, विनय यादव, गोविंद यादव, पुनाराम देवांगन ने बताया कि 3 अप्रैल को जगराता कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इसमें कार्यक्रम के कलाकार काली माता की विशेष झांकी प्रस्तुत करेंगे।