
‘स्कूटी दीदी’ (फोटो सोर्स- पत्रिका)
धमतरी@भूपेंद्र पटवा। Mother’s Day 2026: अक्सर कहा जाता है कि एक मां के हाथ सिर्फ घर की जिम्मेदारियों और रसोई तक सीमित होते हैं, लेकिन धमतरी के कुरुद ब्लॉक के ग्राम उमरदा की एनु चंद्राकर ने इस रूढ़िवादी सोच को अपनी स्कूटी के पहियों तले रौंद दिया है। आज पूरा जिला उन्हें ‘स्कूटी दीदी’ के नाम से जानता है। मदर्स डे के खास मौके पर एनु की कहानी उन तमाम माताओं के लिए मिसाल है, जो गृहस्थी संभालने के साथ-साथ अपने सपनों को भी उड़ान देना चाहती हैं।
एनु कहती हैं, “यदि मन में जुनून हो तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।” उनका अगला लक्ष्य कार ड्राइविंग स्कूल खोलना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की अधिक से अधिक महिलाएँ तकनीकी रूप से सशक्त हो सकें। एनु की यह कहानी साबित करती है कि एक मां अगर ठान ले, तो वह न सिर्फ अपना घर संवार सकती है, बल्कि समाज की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखा सकती है।
पोस्ट ग्रेजुएशन कर चुकी एनु पहले घर पर सिलाई-कढ़ाई का काम करती थीं। उनके पति उत्तम चंद्राकर एक कपड़े की दुकान में सेल्समैन हैं। संयुक्त परिवार और बढ़ती महंगाई के बीच घर चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया था। एनु कुछ नया करना चाहती थीं, लेकिन सामाजिक बेड़ियां उनके रास्ते का रोड़ा बन रही थीं।
इसी दौरान ‘बिहान’ के माध्यम से उनकी मुलाकात प्रथम एजुकेशन के फील्ड वर्कर सोमन साहू से हुई। पति के अटूट प्रोत्साहन और सोमन के मार्गदर्शन ने एनु के भीतर वह आत्मविश्वास जगाया, जिसकी उन्हें तलाश थी।
एनु बताती हैं कि जब उन्होंने पहली बार घर से बाहर निकलकर महिलाओं और युवतियों को स्कूटी सिखाने का फैसला किया, तो समाज ने कई ताने दिए। लोग कहते थे, “औरत होकर क्या सिखाएगी?” लेकिन एनु ने हार नहीं मानी। तीन महीने के कठिन प्रशिक्षण के बाद वह खुद दक्ष हुईं और अब तक 35 से अधिक महिलाओं और युवतियों को स्कूटी चलाना सिखा चुकी हैं। वह केवल एक ट्रेनर नहीं, बल्कि अपनी शिष्याओं के लिए ‘गुरु मां’ बन चुकी हैं।
एनु की इस जिजीविषा को जिला प्रशासन ने भी सराहा है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में उन्हें ‘स्कूटी दीदी’ के प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। कुछ ही महीनों में उन्हें इस काम से लगभग 40 हजार रुपये की आय हो चुकी है। अब एनु का सपना कार ड्राइविंग स्कूल शुरू करने का है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों की ज्यादा से ज्यादा महिलाएँ आत्मनिर्भर बन सकें और अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
Updated on:
10 May 2026, 3:35 PM IST
Published on:
10 May 2026, 3:35 PM IST
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