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Rath Yatra 2024: शहर में 1 जुलाई को निकलेगी ऐतिहासिक रथयात्रा

Rath Yatra 2024: धूमधाम से इस साल भी रथयात्रा महोत्सव मनाएंगे। पारंपरिक गजामूंग का प्रसाद भक्तों को बाटेंगे।

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Rath Yatra 2024

Rath Yatra 2024: रथयात्रा महोत्सव की शुरुवात इस साल 29 जून से शुरू हो रही है। महाप्रभु के स्नान के साथ पर्व का आगाज होगा। जगदीश मंदिर ट्रस्ट ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। शहर में 1 जुलाई को भव्य व ऐतिहासिक रथयात्रा शहर में निकलेगी। जगदीश मंदिर से रथयात्रा पूर्व की तरह सदर बाजार होते हुए जनकपुर पहुंचेगी।

रास्तेभर भक्त भगवान का दर्शन पा सकेंगे। स्नान के बाद परंपरा अनुरूप भगवान बीमार पड़ जाएंगे। मंदिर में भक्तों को काढ़ा का वितरण किया जाएगा। काढ़ा के लिए मंदिर में हर साल भक्तों की लंबी लाइन लगती है। रथयात्रा देखने धमतरी के अलावा आसपास गांव से बड़ी संया में लोग पहुंचते हैं।

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प्राण-प्रतिष्ठा, पूजा हवन 6 जुलाई को

29 जून को सुबन 10.30 बजे महाप्रभु को स्नान कराया जाएगा। 2 जुलाई से 5 जुलाई तक सुबह 7.30 बजे से ओषधि काढ़ा का वितरण किया जाएगा। 6 जुलाई को सुबह 9.30 बजे प्राण-प्रतिष्ठा, पूजा, हवन का कार्य₹म होगा। 7 जुलाई को दोपहर 1.30 बजे भगवान की रथयात्रा रवाना होगी। साथ ही 20 जुलाई को दोपहर 1.30 बजे रथयात्रा की जनकपुर से मंदिर में वापसी होगी।

रथ का हो रहा रंग-रोगन

रथयात्रा शहर में 105 वर्षो से निकल रही है। इस साल 106 वा रथयात्रा महोत्सव मनाया जाएगा। ट्रस्ट के अध्यक्ष किरण गांधी ने कहा कि रथयात्रा की तैयारी युद्धस्तर पर चल रही है। रथ का रंग-रोगन शुरू हो गया है। कार्यक्रम की रूप रेखा बना ली गई है। विधि विधान से सभी पूजा कार्य₹म सपन्न कराया जाएगा। धूमधाम से इस साल भी रथयात्रा महोत्सव मनाएंगे। पारंपरिक गजामूंग का प्रसाद भक्तों को बाटेंगे।

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Rath Yatra 2024: छत्तीसगढ़ की रथ यात्रा का विवरण


छत्तीसगढ़, जो कि अपनी विविध सांस्कृतिक धरोहरों और परंपराओं के लिए जाना जाता है, यहां की रथ यात्रा एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन है। इस राज्य में अनेक प्रकार की रथ यात्राएं आयोजित की जाती हैं, जो विशेषत: भगवान जगन्नाथ, राधा-कृष्ण और अन्य देवी-देवताओं को समर्पित होती हैं। इन रथ यात्राओं का धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व है, जो छत्तीसगढ़ की ग्रामीण और शहरी जनसंख्या को एक साथ जोड़ता है।

रथ यात्रा का इतिहास और महत्व


छत्तीसगढ़ में रथ यात्रा का इतिहास काफी पुराना है और यह ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा से प्रेरित है। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की रथ यात्रा छत्तीसगढ़ के विभिन्न हिस्सों में भी उतनी ही श्रद्धा और धूमधाम से मनाई जाती है। यह यात्रा सामान्यत: आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को आरंभ होती है और इसमें हजारों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

प्रमुख रथ यात्राएं
1. रायपुर की जगन्नाथ रथ यात्रा


रायपुर, छत्तीसगढ़ की राजधानी, यहां की सबसे प्रसिद्ध रथ यात्रा का आयोजन करती है। यह यात्रा भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को समर्पित है। रथ यात्रा की शुरुआत जगन्नाथ मंदिर से होती है और यह शहर के विभिन्न हिस्सों से गुजरती है। इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं, जो अपने आराध्य देवता के दर्शन के लिए आते हैं।

2. दंतेवाड़ा की मावली माता रथ यात्रा


दंतेवाड़ा में आयोजित होने वाली मावली माता की रथ यात्रा भी काफी प्रसिद्ध है। यह यात्रा विशेष रूप से आदिवासी समुदाय के लोगों के बीच बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। मावली माता, जिन्हें दुर्गा का रूप माना जाता है, की मूर्ति को सजाकर रथ पर विराजमान किया जाता है और यात्रा निकाली जाती है।

3. बिलासपुर की महमाया देवी रथ यात्रा


बिलासपुर में महमाया देवी की रथ यात्रा भी एक प्रमुख धार्मिक आयोजन है। यह यात्रा शारदीय नवरात्रि के दौरान आयोजित की जाती है। महमाया देवी का मंदिर बिलासपुर में स्थित है और यहां से रथ यात्रा का शुभारंभ होता है। इस यात्रा में भारी संख्या में भक्तजन शामिल होते हैं और अपने देवी से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

रथ यात्रा की तैयारी


रथ यात्रा की तैयारी कई सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती है। मंदिरों को सजाया जाता है और रथ को भव्य रूप से सजाया जाता है। रथ को खींचने के लिए मजबूत रस्सों का प्रबंध किया जाता है और श्रद्धालु स्वयं इसे खींचते हैं। यात्रा के दौरान भजन-कीर्तन और धार्मिक गीत गाए जाते हैं। विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें स्थानीय कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

रथ यात्राओं का डेटा चार्ट

यहाँ छत्तीसगढ़ की विभिन्न रथ यात्राओं में पिछले पाँच वर्षों के दौरान भागीदारी का डेटा चार्ट प्रस्तुत किया गया है। चार्ट में रायपुर, दंतेवाड़ा और बिलासपुर की रथ यात्राओं में शामिल होने वाले लोगों की संख्या को दर्शाया गया है।

इस चार्ट से स्पष्ट होता है कि समय के साथ रथ यात्राओं में भागीदारी में वृद्धि हुई है, जो इन आयोजनों की बढ़ती लोकप्रियता और धार्मिक महत्व को दर्शाती है।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व


रथ यात्रा का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व भी अत्यधिक है। यह आयोजन समुदाय के लोगों को एक साथ लाता है और सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है। इस दौरान लोग अपने मतभेदों को भुलाकर एक साथ मिलकर भगवान की आराधना करते हैं। यह यात्रा छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

रथ यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था


रथ यात्रा के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल इस आयोजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्पर रहते हैं। यात्रा मार्ग पर ट्रैफिक नियंत्रण और आपातकालीन सेवाओं का प्रबंध भी किया जाता है। इस दौरान साफ-सफाई और स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखा जाता है।

आर्थिक प्रभाव


रथ यात्रा का आर्थिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है। इस आयोजन के दौरान स्थानीय व्यापार और व्यवसाय को बढ़ावा मिलता है। तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की बड़ी संख्या के कारण होटल, भोजनालय और परिवहन सेवाओं का व्यवसाय भी बढ़ता है। इसके अलावा, स्थानीय हस्तशिल्प और उत्पादों की बिक्री में भी वृद्धि होती है।

राज्य की सांस्कृतिक धरोहर


छत्तीसगढ़ की रथ यात्रा न केवल धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह आयोजन राज्य की सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और बढ़ावा देने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इस यात्रा के माध्यम से लोगों में धार्मिक आस्था और एकता की भावना को बढ़ावा मिलता है। छत्तीसगढ़ की रथ यात्रा वास्तव में एक अद्वितीय और अनुपम आयोजन है, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को प्रदर्शित करता है।

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