
hitansi हितांशी- Photo source Patrika.com
Dhar Hitanshi Story-धार की तीन साल की मासूम हितांशी की दर्दभरी कहानी ने न केवल उसके परिवार को झकझोर दिया, बल्कि समाज के संवेदनशील लोगों के दिलों को भी छू लिया। कुत्ते के हमले में गंभीर रूप से घायल हुई इस नन्ही बच्ची के उपचार की खबर जब 'पत्रिका' में प्रमुखता से प्रकाशित हुई तो मदद के लिए कई हाथ आगे बढ़ आए। उद्योगपतियों, समाजसेवियों और प्रशासन ने परिवार से संपर्क कर सहायता का भरोसा दिलाया है। इस बीच अस्पताल से आई एक छोटी सी खबर ने पूरे परिवार के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी। दो दिन तक दर्द से कराहती रही हितांशी ने जब पट्टी हटने के बाद अपनी मां को पुकारा, तो वहां मौजूद पिता की आंखें भर आईं।
धार Dhar जिले के नालछा क्षेत्र के ग्राम बांग्लाबिलौद निवासी किसान आनंद जाट की तीन वर्षीय बेटी हितांशी रविवार शाम उस समय गंभीर रूप से घायल हो गई थी, जब एक खूंखार कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया। हमले में बच्ची के चेहरे पर गहरे घाव हो गए थे। परिजन तत्काल उसे इंदौर के एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसकी जान बचाने के लिए लंबा ऑपरेशन किया। चेहरे पर करीब 70 टांके लगाए गए और प्लास्टिक सर्जरी भी करनी पड़ी।
उम्मीद की किरण
परिवार जहां बेटी के दर्द और इलाज के खर्च को लेकर चिंतित था, वहीं 'पत्रिका' में प्रकाशित समाचार के बाद हालात बदलने लगे। खबर पढकऱ इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के कई समाजसेवियों ने परिवार से संपर्क किया। किसी ने आर्थिक सहयोग की पेशकश की, तो कोई दवाइयों की व्यवस्था लेकर अस्पताल पहुंचा। मदद की यह भावना परिवार के लिए संबल बनकर सामने आई।
हितांशी के पिता आनंद जाट ने बताया कि फिलहाल उन्होंने उपचार की व्यवस्था अपने स्तर पर कर ली है, लेकिन जिस तरह लोगों ने आगे बढकऱ सहयोग का हाथ बढ़ाया है, उससे उन्हें मानसिक मजबूती मिली है। आवश्यकता पडऩे पर वे इस सहायता को स्वीकार करेंगे।
घटना के बाद का तीसरा दिन परिवार के लिए भावुक कर देने वाला रहा। डॉक्टरों ने हितांशी के चेहरे पर बंधी पट्टियां हटाईं। दो दिनों से दर्द और उपचार के कारण बच्ची ठीक से बोल नहीं पा रही थी। जैसे ही चेहरे से पट्टी हटाई गई, उसने धीमी आवाज में अपनी मां को पुकारा-'मम्मी…' यह शब्द सुनते ही पास खड़े पिता की आंखों से आंसू छलक पड़े। मां ने बेटी को सीने से लगाया और लंबे समय बाद परिवार ने राहत की सांस ली।
डॉक्टरों के अनुसार प्लॉस्टिक सर्जरी के बाद मंगलवार को हितांशी की पट्टी हटाई गई। उसकी स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है, हालांकि अभी उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। फिलहाल हितांशी को नली के माध्यम से पानी और दूध दिया जा रहा है।
मासूम की हालत और परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने भी मदद का भरोसा दिया है। धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा कि शासन के नियमों के तहत बच्ची के उपचार के लिए हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही रेडक्रॉस सोसायटी के माध्यम से भी आर्थिक सहयोग देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने बताया कि जिले में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों को स्ट्रीट डॉग्स की निगरानी और नियंत्रण के निर्देश दिए गए हैं।
एक ओर अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की लड़ाई लड़ रही मासूम हितांशी है तो दूसरी ओर समाज के वे लोग हैं जिन्होंने बिना किसी स्वार्थ के उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाया। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मुश्किल समय में संवेदनशील समाज ही सबसे बड़ी ताकत बनता है। हितांशी की मुस्कान लौटाने की इस कोशिश में अब पूरा समाज उसके साथ खड़ा नजर आ रहा है।
Updated on:
17 Jun 2026 08:28 am
Published on:
17 Jun 2026 08:27 am
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