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Tourist Place: मांडू में बड़े उत्सव की तैयारी, इसलिए खास है यह ऐतिहासिक नगर

नए साल में मांडू उत्सव की संभावना, 30 दिसंबर से हो सकती है शुरुआत, 16 दिसंबर को भोपाल में खुलना है टेंडर : इस बार नई स्पोर्ट्स गतिविधियां भी होंगी शामिल

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धार

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Manish Geete

Dec 09, 2022

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धार। विश्व प्रसिद्ध मांडू में उत्सव की तैयारी तेज हो गई है। इस ऐतिहासिक नगरी में हर साल दिसंबर से जनवरी के बीच टूरिज्म से लेकर स्पोर्ट्स गतिविधियां भी की जाती हैं। देशी-विदेशी टूरिस्ट को ध्यान में रखकर तैयारी की जा रही है।

मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित मांडू उत्सव इस बार खास होने वाला है। तीन माह तक यहां टेंट सिटी बनाए जाने की तैयारी है। खास बात यह भी है कि मांडू उत्सव (mandu utsav) खत्म होने के बाद भी यह टेंट सिटी बनी रहेगी। सर्दियों के पूरे सीजन भर मांडू में ठहरने की काफी व्यवस्था रहेगी। पर्यटक तीन माह तक टेंट सिटी में ठहरकर मांडू के प्राकृतिक सौंदर्य का लुत्फ उठा सकेंगे। मांडू उत्सव संभलत 30 दिसंबर से 3 जनवरी के बीच होगा। इसकी आधिकारीक घोषणा होने वाली है।

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क्या है मांडू में खास

600 साल पहले भी था रेन वाटर हार्वेस्टिंग

जहाज महल की जल संरचनाएं आज भी शोध का विषय बनी रहती है। यहां 600 साल पहले भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग था, जो आज भी नजर आता है। भुंज तालाब और कपूर तालाब का अंडर ग्राउंड कनेक्शन हैं। रहट विधि से इसका पानी महल में बने स्विमिंग पूल में जाता था। प्राचीन काल में मांडू में लगभग 700 जल स्रोत थे। मुगल शासक जहांगीर ने 1617 में 42वां जन्मदिन यहीं मनाया था। वे पत्नी नूरजहां के साथ जहाज महल में 7 माह तक रहे थे।

बाजबहादुर का महल

मांडू नगर में बाजबहादुर का महल भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। यहां आकर लोग रानी रूपमती और बाज बहादुर की प्रेम कहानी को लोग बार-बार सुनना चाहते हैं। बाज बहादुर का महल यहां आने वालों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहता है। यहां के झरोखे से रानी रूपमती महल का नजारा देखा जा सकता है। बाज बहादुर अपने इसी महल से रूपमती के महल को निहारा करते थे।

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हिंडोले के समान दिखने वाला महल

जहाज महल के करीब ही हिंडोला महल भी है, जो अपनी कारीगरी के लिए भी लोगों को आकर्षित करता है। इसकी बाहरी दीवारें झुकी हुई नजर आती है, जो झूले की तरह दिखती है। इस कारण इसे हिंडोला महल कहा जाता है। सैकड़ों सालों से इसकी इमारत आज भी मजबूती के साथ खड़ी हुई है।

रानी रूपमती की छतरी

बाजबहादुर महल से नजर आने वाला महल रानी रूपमती का महल यहां सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहता है। इसकी छतरी से रानी रूपमती नर्मदा का दर्शन करती थी। खास बात यह है कि बाज बहादुर ने रानी रूपमती के लिए ही इस महल को बनवाया था। यह स्थान मांडू नगर की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित है। रानी रूपमती का प्रण था कि वो हर दिन मां नर्मदा का दर्शन करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करती थीं। इसी को ध्यान में रखकर बाजबहादुर ने इस छतरी को बनवाया था। इन दोनों की प्रेम कहानी बड़ी दिलचस्प है।

यह भी है खास

इसके अलावा अशर्फी महल, लोहानी गुफाएं, गदाशाह की दुकान, होशंगशाह का मकबरा, नीलकंठेश्वर महादेव, इको प्वाइंट (दाई का महल) आदि यहां आकर्षण का केंद्र बने रहते हैं।