सावित्री ठाकुर के पिता अंतरसिंह दरबार वन विभाग में कर्मचारी थे। परिवार में पति तुकाराम खेती करते हैं। उनके दो बेटे हैं। समाजसेवा करने के मकसद से सावित्री एक एनजीओ से जुड़ीं। धार, बड़वानी और खंडवा जिले के कई गांवों में आदिवासी, गरीब और अशिक्षित महिलाओं के उत्थान के लिए काम किया। सावित्री को राजनीति में लाने का श्रेय उस समय के धरमपुरी विधायक जगदीश मुवेल और तत्कालीन पार्टी जिलाध्यक्ष विनोद शर्मा को जाता है। उन्होंने काबिलियत को समझा और आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया।