
विष्णु यादव
मांडू। यहां पर आने वाले दिनों में जी-20 सम्मेलन है। सम्मेलन में आने वाले प्रवासियों को चकाचक महल दिखाने के चक्कर में सालों पुरानी धरोहरों से छेडछाड की जा रही है। मांडू के जहाज महल परिसर के अंदर हिंडोला महल के नजदीक बने हुए पुरातन गुप्त रास्ते और गुफाओं को पत्थरों से ढंक दिया गया है। ताकि सब कुछ अच्छा दिखाया जा सके । इसके पूर्व इन गुफाओं पर सुरक्षा के लिए लोहे की जालियां लगाई गई थी। इससे पर्यटक इन गुफाओं का रोचक इतिहास जान पाते थे और दीदार कर आश्चर्यचकित होते थे। अंडर ग्राउंड बने यह गुप्त रास्ते के बारे में जिज्ञासु होकर जानकारियां लेतेे थे लेकिन अब इन इतिहास प्रेमियों को निराश होना पड़ेगा। क्योंकि विभाग ने अब इन गुफाओं और गुप्त रास्तों ने बंद कर दिया है।
रास्ते किए बंद
इतिहास के जानकारों की माने तो यह रास्ते परमार कालीन हैं। मांडू के वरिष्ठ गाइड योगेंद्र परिहार ने बताया कि हिंडोला महल के नजदीक बने यह गुप्त रास्ते और गुफाएं सुरक्षा के हिसाब से बनाए गए थे। जहां पर हथियार गोला, बारूद रखे जाते थे। साथ ही चंपा बावड़ी परिषद से यह रास्ते कई शाखाओं में फैले हुए हैं। हिंडोला महल परिसर में बने छोटे-छोटे हैं। गुप्त रास्ते इन्हीं शाखाओं में जाकर मिलते हैं। जानकारों के मुताबिक ये गुफा उज्जैन तक जाती है।
बाद में इन्हें हटा दिया जाएगा
इस मामले में पुरातत्व विभाग के प्रशांत पाटणकर नेे बताया कि पहले यहां लोहे की जाली लगाई गई थी। जो अच्छी नहीं दिखाई दे रही थी इसलिए यहां पर चबूतरा बना दिया है। जी 20 सम्मेलन के बाद इसे हटा दिया जाएगा।
Updated on:
31 Jan 2023 11:49 am
Published on:
31 Jan 2023 11:46 am
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