14 जून 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Chaitra Navratri 2021: नवरात्रि के दूसरे दिन ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा

Chaitra Navratri 2021: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। इनकी पूजा से भक्तों के समस्त कष्ट शांत होकर सुख की प्राप्ति होती है।

2 min read
Google source verification

image

Sunil Sharma

Apr 13, 2021

how_to_worship_ma_brahmacharini_on_chaitra_navratri_2021.jpg

Chaitra Navratri 2021: चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। अपने इस स्वरूप में मां भगवती अत्यन्त शांत तथा मनोहर मुखमुद्रा वाली है। उनके दर्शन मात्र से व्यक्ति को परम शांति का अनुभव होता है।

यह भी पढें: दाह संस्कार से जुड़ी ये बातें नहीं जानते होंगे आप, जानिए क्यों है जरूरी

यह भी पढें: 36 तरह की बीमारियों का इलाज होता है बाबा के इस डंडे से

मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तथा कथा
सती ने दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह करने के बाद हिमालय के घर पार्वती रुप में जन्म लिया। उन्होंने नारद मुनि के उपदेश सुन भगवान शिव को ही अपना भावी पति मान लिया और उन्हें प्राप्त करने के लिए ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए अखंड तप आरंभ कर दिया। उन्होंने एक हजार वर्ष तक केवल मात्र फल-फूल खाते हुए तप किया। इसके बाद कई हजार वर्षों तक वह पूर्ण निराहार और निर्जल रह कर तप करती रही। अंत में उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें दर्शन दिए। इसी कारण उनका नाम ब्रह्मचारिणी पड़ा। इनकी स्तुति से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं।

यह भी पढेः इन 10 उपायों से आप भी कुंडली के ग्रहों को बंदी बना सकते है

यह भी पढेः सिर्फ हवा खाकर जिंदा रहते थे बाबा पयोहारी, और भी हैं चमत्कार

ऐसे करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा
भगवती के इस स्वरूप की पूजा करने के लिए स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ धुले हुए वस्त्र पहनें तथा देवी के सामने एक आसन पर बैठ कर फूल, अक्षत, दीपक, धूप आदि से उनकी पूजा करें। इसके बाद प्रसाद चढ़ाएं और निम्न मंत्र बोलते हुए उनका आव्हान करें।

या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डल
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा

इसके बाद देवी को प्रसाद अर्पण करें तथा उनसे जाने-अनजाने में हुई अपनी भूलों के लिए क्षमाप्रार्थना करते हुए उनसे अपने कष्टों को हरने की प्रार्थना करें।