दशहरे के दिन यहां के लोग मनाते हैं मातम, घर में नहीं जलते चूल्हे

दशहरे के दिन यहां के लोग मनाते हैं मातम, घर में नहीं जलते चूल्हे

Devendra Kashyap | Updated: 07 Oct 2019, 12:01:04 PM (IST) धर्म कर्म

रावण सारस्वत ब्राह्मण पुलस्त्य ऋषि का पौत्र और विश्रवा का पुत्र था। ऋषि विश्रवा के नाम पर इस गांव का नाम बिसरख रखा गया।

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि शारदीय नवरात्रि के नवमी तिथि के अगले दिन दशहरा मनाया जाता है। इस दिन लोग रावण का प्रतिकात्मक दहन करते हैं। मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का पर विजय प्राप्त की थी। इस मौके पर हम आपको एक ऐसे गांव के बारे में बताने जा रहा हैं, जहां दशहरे के दिन मातम मनाया जाता है।

ये भी पढ़ें- दशहरे पर करें ये छोटा सा उपाय, कर्ज से मिल जाएगी मुक्ति और हो जाएंगे मालामाल


यही नहीं, इस दिन घरों में चूल्हे तक नहीं जलते हैं। यह परंपरा इस गांव में वर्षों से चली आ रही है। यह गांव है उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर में। इस गांव का नाम बिसरख ( ग्रेटर नोएडा वेस्ट ) है

ravana.jpg

रावण के पिता के नाम पर पड़ा इस गांव का नाम बिसरख

लोग बताते हैं कि इस गांव का नाम बिसरख रावण के पिता के नाम पर रखा गया है। जैसा कि हम सभी जानते हैं कि रावण सारस्वत ब्राह्मण पुलस्त्य ऋषि का पौत्र और विश्रवा का पुत्र था। ऋषि विश्रवा के नाम पर इस गांव का नाम बिसरख रख दिया गया।

ravana1.jpg

खुद को रावण के वंशज मानते हैं यहां के लोग

बिसरख में रहने वाले लोग खुद को रावण के वंशज मानते हैं। यहां के लोग रावण परिवार की पूजा करते हैं। ग्रामीण भगवान की तरह रावण की भी पूजा करते हैं। लोग बताते हैं कि हर शुभ काम की शुरुआत रावण की पूजा आराधना के बाद ही शुरू की जाती है। इस गांव में न तो कभी रामलीला का मंचन होता है ना ही यहां के लोग विजयादशमी मनाते हैं।

bisrakh2.jpg

रावण का जन्म बिसरख में ही हुआ था

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रेता युग में बिसरख गांव में ऋषि विश्रवा का जन्म हुआ था। बताया जाता है ऋषि विश्रवा ने इस गांव में शिवलिंग की स्थापना की थी। ऋषि विश्रवा के घर रावण का जन्म हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण ने भगवान शिव की तपस्या इसी गांव में की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण को पराक्रमी होने का वरदान दिया था।

bisrakh23.jpg

यहां पर है अष्टभुजा वाला शिवलिंग

स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्षों पहले यहां पर एक तांत्रिक ने खुदाई करवाई थी, खुदाई में यहां अष्टभुजा वाला शिवलिंग निकला। इस शिवलिंग की गहराई इतनी है कि खुदाई के बाद भी उसका छोर अब तक नहीं मिला। लोग बताते हैं यह वही शिवलिंग है, जिसकी स्थापान ऋषि विश्रवा ने की थी। यहां पर एक रावण मंदिर भी है, जिसकी पूजा करने के बाद ही लोग शुभ कार्य की शुरुआत करते हैं।

Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned