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इस बार कालाष्टमी क्यों है अति विशेष, साथ ही जानें पूजा का विशेष मुहूर्त और विधि

- अधिकमास 2023 की कालाष्टमी, भूलकर भी न करें आज के दिन ये कार्य - अधिकमास की कालाष्टमी, पूजा के लिए बहुत शुभ है ये दिन, जानें मुहूर्त

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Deepesh Tiwari

Aug 08, 2023

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Adhik Maas Kalashtami 2023: भगवान शिव के रौद्र रूप को काल भैरव के रूप में जाना जाता है। वहीं कालाष्टमी पर्व पर काल भैरव के साथ भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। यहां जान लें कि देश के अनेक क्षेत्रों में इस दिन देवी मां दुर्गा की पूजा का भी विधान है। कालाष्टमी को कालभैरव जयंती या भैरव जयंती के नाम से भी जाना जाता हैं। कालाष्टमी हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी का दिन है।

ऐसे में इस बार भी अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी का व्रत रहेगा। भगवान शिव के रौद्र रूप भगवान भैरव को इस दौरान भक्तों द्वारा पूजा जाएगा। माना जाता है कि काल भैरव भगवान की पूजा करने से जहां शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है तो वहीं ऐसे व्यक्ति को अकाल मृत्यु से भी छुटकारा मिल जाता है।

ये है खास
इस बार ये कालाष्टमी अधिकमास की होने के चलते 3 साल बाद आ रही है। जिस कारण शिव के रुद्र अवतार भगवान काल भैरव की इस दिन पूजा का विशेष महत्व वाली हो गई है, तो चलिए जानते हैं कि अधिकमास में कालाष्टमी से जुड़ी हर वो बात जो आप जानना चाहते हैं...

यहां ये भी जान लें कि इस बार ये कालाष्टमी सावन के अधिकमास में पड़ रही है, और सावन को भगवान शिव का प्रिय माह माना गया है, ऐसे में कालभैरव भी भगवान शिव के रूप होने के चलते इस समय उन्हें प्रसन्न करना आसान माना जाता है।

अधिकमास कालाष्टमी 2023 की तारीख
अधिकमास कालाष्टमी व्रत मंगलवार, 8 अगस्त 2023 को रखने के साथ ही इस दिन मां मंगला गौरी की भी पूजा की जाएगी। सावन अधिक मास होने के कारण यह दिन मंगला गौरी व्रत का भी रहेगा।

अधिकमास कालाष्टमी 2023 के विशेष मुहूर्त
पंचांग के अनुसार अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि मंगलवार, 08 अगस्त 2023 को सुबह 04.14 बजे से शुरू होकर बुधवार, 09 अगस्त 2023 को सुबह 03.52 बजे तक रहेगी।

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सुबह का मुहूर्त - सुबह 09.31 - 11.07
निशिता काल मुहूर्त - सुबह 12.22 - सुबह 01.06 (9 अगस्त 2023)

अधिकमास रू कालाष्टमी पूजा विधि
मान्यता के अनुसार बाबा काल भैरव की पूजा निशिता काल मुहूर्त में की जाती है, परंतु यह भी माना जाता है कि गृहस्थों को इस दिन शिवलिंग पर लाल चंदन से ऊं लिखकर बेलपत्र चढ़ाने के साथ ही विधि विधान से शिव की पूजा करनी चाहिए। वहीं इस दिन नकारात्मक शक्तियों से छुटकारे के लिए -ऊॅं कालभैरवाय नमरू- का जप और कालभैरवाष्टक का पाठ करना चाहिए। इस दिन ग्रहस्थों को मुख्य रूप से बटूक भैरव की पूजा करनी चाहिए।

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इसके साथ ही इस दिन काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाने के अलावा काला तिल, काले वस्त्र, इमरती, जलेबी का भी दान करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से ग्रहों के दुष्प्रभाव कम हो जाता है।

कालाष्टमी पर गलती से भी न करें ये काम
1. कालाष्टमी के दिन झूठ न बोलें। माना जाता है कि इस दिन झूठ बोलने से आपको भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।
2. काल भैरव की पूजा कभी भी किसी के नुकसान के मकसद से नहीं करनी चाहिए।
3. इस दिन भूलकर भी माता-पिता और गुरुओं को अपमानित नहीं करना चाहिए।
4. कभी भी काल भैरव की पूजा अकेले नहीं करनी चाहिए, यानि इस दिन पूजा में भगवान शिव और माता पार्वती को अवश्य शामिल करना चाहिए।
6. भगवान भैरव के तामसिक रूप की पूजा गृहस्थ लोगों को नहीं करनी चाहिए।
7. इस दिन भूलकर भी श्वानों पर अत्याचार न करें, बल्कि जहां तक हो सके इस दिन उन्हें भोजन कराएं।

अधिकमास कालाष्टमी : महत्व
मान्यता के अनुसार काल भैरव- भगवान शिव का रौद्र रूप है, इन्हें तंत्र-मंत्र के देवता भी माना जाता है। वहीं देवी मंदिरों के पास भैरव का मंदिर भी होता है। माना जाता है कि इनकी पूजा नकारात्मक शक्तियों को दूर रखती हैं। तांत्रिक दुर्लभ सिद्धियां पाने के लिए भी लोग काल भैरव की खास पूजा करते हैं। काल भैरव के अनेक रूप माने गए है, इन्हीं में से एक बाबा बटुक भैरव की उपासना ग्रहस्थों के लिए विशेष मानी गई है। माना जाता है कि इनकी पूजा से अकाल मृत्यु का भय टल जाता है साथ ही जीवन में कभी संकट भी नहीं आता।


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