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Dholpur: 13 करोड़ खर्च पर 13 बाल्टी पानी नहीं मिला, नागरिकों को करनी पड़ रही मशक्कत

पेयजल योजना की असफलता के आरोप नागरिकों के लगाए जाने के बाद भी न तो विभाग चेता न प्रशासन और न ही सरकार।

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Photo- Patrika Network

धौलपुर के राजाखेड़ा में दशकों के इंतजार के बाद चुनाव पूर्व आनन-फानन में तैयार की गई 13 करोड़ की शहरी पुनर्गठित पेयजल योजना की असफलता के आरोप नागरिकों के लगाए जाने के बाद भी न तो विभाग चेता न प्रशासन और न ही सरकार। लेकिन करदाताओं की गाढी कमाई की बर्बादी के बाद भी खामियाजा आम नागरिकों को ही उठाना पड़ रहा है।

जलदाय विभाग की नई योजना से आशा बंधाई गयी थी कि दोनों समय टंकी से गुणवत्तापूर्ण पेयजल की निर्धारित समय पर सप्लाई होगी, लेकिन आधे राजाखेड़ा में हालात यह है कि दोनों समय तो कभी पानी आया ही नहीं एक समय भी परिवार के कंठ तर करने लायक साफ पानी नहीं मिल पा रहा। सुबह उठते ही एक एक बाल्टी के लिए कड़ी मशक्कत विभाग की योजनाओं और कर्यप्रणाली कि पोल खोल कर रख देती है। ऊपर से लोगो का दर्द की प्रशाशनिक अधिकारी बस मीडिया में शेर बने रहते है कभी अपने एयर कंडीशनर चेम्बर्स से बाहर निकलकर आमजनता की पीडा को न देखना चाहते न समझना चाहते।

दशकों से अनसुलझे कारण

पिछले कई दशक से विभागीय लापरवाही से हजारों की संख्या में अवैध कनेक्शन खुले पाइपों से किए हुए हैं जिनसे बर्बाद होता भूजल अब भूजलस्तर को बेहद खतरनाक मुकाम पर ले आया है। नवीन स्कीम के अनियोजित वितरण से मुख्य लाइनों के आस पास आधे राजखेड़ा में तो बेहद प्रेशर है जहां खुले नलों से पानी की भारी बर्बादी होती है और उसके चलते शेष आधा राजाखेड़ा डेड एंड का रूप लेकर बूंद-बूंद को परेशान है, लेकिन विभागीय अधिकारी सिर्फ निर्माण और मरम्मत कार्यों के बजट में ही जुटे रहते हैं, लेकिन पानी के उचित वितरण, स्कीम के सफल संचालन व अन्य जनसुविधाओं के कार्यों में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाते।

इसके चलते विभाग को राजस्व तक नही मिल पा रहा ह ओर सिर्फ 25 फीसदी ईमानदार लोग कनेक्शन धारी है जो बिल भुगतान कर रहे है । 75 फीसदी अवैध कनेक्शनधारी जो विभाग की विशेष मेहरबानी से लाइन तोड़ कर पानी बर्बाद कर रहे एसरकारी संपत्ति को ध्वस्त कर रहे वे इमानदार उपभोक्ताओं को चिढ़ा रहे हैं।

गंदे पानी ने पनपाए आरओ प्लांट

विभागीय लापरवाही से अवैध कनेक्शनों से हुई लीकेजों से नलों में शुद्ध की जगह प्रदूषित पानी बह रहा है जो लोग पीने के काम भी नही ले पाते। ऐसे में क्षेत्र में दर्जनों अवैध आरओ प्लांट कुकुरमुत्तों की तरह उग आए हैं और उन्होंने लोगो की मजबूरी का फायदा उठाकर दाम डेड गुने तक कर दिए है। इनकी बिकी भी 30 हजार लीटर से अधिक प्रतिदिन तो सिर्फ मुख्य बाजारों में ही हो रहि है शेष इलाका अलग ।

जो पानी हमे दे रहे हैं इसको विभाग के अधिकारी पी सकते हैं क्या?

-बंटी खान, नागरिक

13 करोड़ खर्च के बाद 13 बाल्टी रोज शुद्ध पानी मिल जाता तो कलेजे को राहत मिल जाती।

-इरफान खान, नागरिक

दिन में एक बार सिर्फ 35 से 45 मिनिट पानी आता है। हैंडपम्प से भरने में केवल साफ सफाई के लिए ही पानी मिल पाता है।

-लल्लू, नागरिक

स्कूल खुल गए हैं। बच्चों को तैयार करें, उनका खाना बनाएं या पानी के लिए मशक्कत करें। पानी ने परेशान कर रखा है।

-गुड्डी, नागरिक