
धौलपुर. तीर्थराज मचकुंड स्थित पहाड़ी जहां बने हैं भगवान श्री कृष्ण के चरण चिन्ह
धौलपुर. तीर्थों के भांजे के रूप में प्रसिद्ध शहर के नजदीक मचकुंड धाम पर अब जल्द कान्हा के भक्त यहां एक पहाड़ी पर बने पवित्र चरण चिह्न के दर्शन कर सकेंगे। मान्यता है कि शिला पर बने चरण चिह्न भगवान श्रीकृष्ण के हैं। अभी यह शिला सामान्य तौर पर है लेकिन अब चरण चिह्न वाले स्थान पर कार्य चल रहा है, जिससे इन्हें संरक्षित रखा जा सके। साथ ही शिला के नीचे बनी गुफानुमा स्थान को भी साफ किया गया।
आगामी जन्माष्टमी पर्व पर उक्त स्थल को भव्य रूप से सजाया जाएगा और यहां पर पूजा कार्यक्रम भी आयोजित होगा। लाडली जगमोहन मंदिर महंत कृष्णदास ने बताया कि यह क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा है और यहां पर हर साल लाखों की संख्या में भक्त दर्शनों के लिए पहुंचते हैं। कहा कि उक्त शिला का संरक्षण होने से भगवान के भक्त इस स्थल के भी दर्शन कर सकेंगे।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में राजा मांधाता के पुत्र मुछकुंद युद्ध नीति में बहुत निपुण थे। देवासुर संग्राम में उन्होंने इंद्र की ओर से सेनापति बनकर युद्ध किया था। युद्ध जीतने के बाद उन्होंने विश्राम की इच्छा जताई, तब देवताओं ने उन्हें यह वरदान दिया। बताया जाता है कि यहां गुफाा में भगवान श्रीकृष्ण ने मुछकुंद को विष्णु रूप में दर्शन दिए और पांच कुंडीय यज्ञ करने का आदेश दिया। मान्यता है कि उस यज्ञ में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण उपस्थित हुए थे। तभी से मचकुंड धाम का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया।
ऐतिहासिक स्थल, संरक्षण हो
यहां मचकुंड की परिक्रमा मार्ग में सरोवर के पास भगवान श्रीकृष्ण के चरण चिह्न होना बताया जाता है। यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। लाड़ली जगमोहन मंदिरए मचकुंड के महंत कृष्णदास बताते हैं कि इस कथा का उल्लेख विष्णु पुराण और श्रीमद्भागवत के दसवें स्कंध; अध्याय 23 व 51द्ध में मिलता है। उन्होंने यह एक ऐतिहासिक स्थल है, जिसका संरक्षण होना चाहिए। जिससे लोग इसके दर्शन कर सकें।
पर्यटन विभाग सुस्त, नहीं मिल रही सुविधाएं
धौलपुर का मचकुंड धाम बेहद लोकप्रिय स्थल है लेकिन यहां पर सुविधाओं का अभाव है जबकि यहां बड़ी संख्या में दर्शनों के लिए लोग पहुंचते हैं। यहां पर कई मंदिर हैं और सरोवर में बड़ी संख्या में लोग डुबकी लगाने आते हैं। साथ ही देवछठ पर यहां लक्खी मेले का आयोजन होता है। जिसमें मध्यप्रदेश, यूपी, हरियाणा और दिल्ली से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं। वर्तमान में यहां खास सुविधाएं नहीं है। यहां पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है। पर्यटक और आम लोग खुद बोतल लेकर आते हैं। साथ ही यहां तक पहुंचने के लिए उन्हें निजी साधन या फिर अलग से ऑटो या ईरिक्शा से आता होता है। यहां सार्वजनिक वाहन व्यवस्था नहीं है।
Updated on:
21 Aug 2026 07:39 pm
Published on:
21 Aug 2026 07:39 pm
